कुमारगंज कृषि विश्वविद्यालय बना पशुओं के इलाज का बड़ा केंद्र:22 जिलों से पहुंच रहे पशुपालक, सस्ती और आधुनिक चिकित्सा का लाभ


आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज अब खेती-किसानी के साथ पशुओं की चिकित्सा का भी बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। पूर्वांचल के लगभग 22 जिलों से प्रतिमाह सैकड़ों पशुपालक अपने बीमार पशुओं को लेकर यहां पहुंच रहे हैं और सस्ती व आधुनिक चिकित्सा का लाभ उठा रहे हैं। विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सालय में अलग-अलग विभागों में 20 विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हैं। यहां प्रतिमाह लगभग 600 बीमार पशुओं का पंजीकरण होता है। औसतन प्रतिदिन 30 से 40 पशुओं का इलाज किया जाता है। अयोध्या, सुल्तानपुर, अमेठी, बाराबंकी, गोंडा, बस्ती, अंबेडकरनगर समेत पूरे पूर्वांचल से लोग यहां आते हैं। पशु चिकित्सालय अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां किडनी, लीवर और खून की उच्चस्तरीय जांच के साथ संबंधित रोगों के उपचार की पूरी व्यवस्था है। अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन से पशुओं की गर्भावस्था में भ्रूण के स्वास्थ्य, पेट, हृदय और ब्रेस्ट की जांच की जाती है। रक्त परीक्षण मशीन, डिजिटल एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की नई आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। चोटिल पशुओं की शल्य चिकित्सा भी की जाती है। टूटी हड्डी को प्लेट, तार व रॉड डालकर जोड़ा जाता है। पेशाब के संक्रमण, पथरी, प्रजनन संबंधी दिक्कतें और ट्यूमर के संक्रमण की सटीक जांच होती है। विभागाध्यक्ष डॉ. सोनू जायसवाल बताते हैं कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ब्लड, बीमारियों के रासायनिक परीक्षण, मल व मूत्र की जांच भी की जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक बीमारी का उपचार करते हैं। यहां पशुओं की ईसीजी भी की जाती है, जिससे हृदय रोग का पता लगाकर समय पर इलाज शुरू किया जाता है। डॉ. जायसवाल के अनुसार, निजी क्लीनिकों की तुलना में यहां सभी जांच और इलाज काफी कम शुल्क पर उपलब्ध हैं। इससे छोटे पशुपालकों को बड़ी राहत मिली है। विवि प्रशासन लगातार सुविधाएं बढ़ा रहा है, ताकि पूर्वांचल के पशुपालकों को बेहतर इलाज के लिए दूर न जाना पड़े।

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