कानपुर RTO में भ्रष्टाचार की शिकायतें सही मिली:चार बिंदुओं पर डीएम और पुलिस कमिश्नर को सौंपी रिपोर्ट, 2200 फोटो, डॅाक्यूमेंट सबमिट


कानपुर आरटीओ में सोमवार को जिला प्रशासन और क्राइम ब्रांच की संयुक्त छापेमारी के बाद विस्तृत रिपोर्ट डीएम व पुलिस कमिश्नर को सौंप दी गई। रिपोर्ट में आरटीओ में व्याप्त भ्रष्टाचार, एजेंटों के जरिए काम करा कर कमीशन वसूली की शिकायतें सही पायी गई। पुलिस ने एजेंटों के पास मिले 11 मोबाइल, मोबाइल में 2200 से अधिक वाहनों की फोटो, लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट व 43 हजार 485 रुपए कैश भी सबमिट किया है। आज पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करेंगे ADCP गुरुवार को स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से मुलाकात करेंगे। जिसके बाद आरटीओ परिसर व पनकी स्थित ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक में लगे सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर, एजेंटों की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) निकाली जाएगी। जिससे यह जानकारी मिल सके कि कौन से कॉमन नंबर सभी एजेंटों के मोबाइल में हैं। एजेंट किन–किन अधिकारी व बाबू के संपर्क में थे। ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर पर कितने लोग रोजाना टेस्ट देने आते थे? कितने लाइसेंस रोज बनते थे ? इन सब की जानकारी डीवीआर की जांच के बाद हो सकेगी। कोर्ट से परमीशन लेकर मोबाइलों की निकाली जाएगी हैश वैल्यू एडीसीपी ने बताया कि पकड़े गए एजेंटों पास से बरामद 11 मोबाइलों में 2200 से अधिक गाड़ियों की फोटो, तमाम व्यक्तियों के आधार कार्ड, पैनकार्ड, गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस मिले थे। मोबाइलों को जब्त कर इन्हें पुख्ता सबूत बनाने के लिए कोर्ट से मोबाइलों की हैश वैल्यू निकालने की परमीशन ली जाएगी। जिसके बाद आरोपियों के मोबाइल में मिले डॉक्यूमेंट सबूत के तौर पर लिए जाएंगे। हैश वैल्यू से यह साबित हो सकेगा कि आरोपियों के मोबाइल में मिले डाटा के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है। क्या होती है हैश वैल्यू हर फाइल (फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट या चैट) का एक अलग और निश्चित लंबाई का हैश कोड होता है। अगर मूल फाइल में एक कॉमा, बिंदु या एक पिक्सेल भी बदल दिया जाए, तो पूरी हैश वैल्यू पूरी तरह बदल जाती है। यह पुष्टि करने में मदद करती है कि डिजिटल डेटा या सबूत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम (भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 / BSA) के तहत कोर्ट में पेश किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक सबूतों (जैसे वाट्सएप चैट या वीडियो) की प्रमाणिकता जांचने के लिए हैश वैल्यू जरूरी होती है। मेन गेट CCTV और सुरक्षाकर्मी से लैस करने की सिफारिश एडीसीपी ने बताया कि रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया आरटीओ विभाग में भ्रष्टाचार, एजेंटों की सक्रियता, एजेंटों की कमीशनखोरी की शिकायतें पूरी तरह से सही पायी गई हैं। जांच में पाया गया है कि सीधे तौर पर पब्लिक का काम करने के बजाए, एजेंटों के कामों को प्राथमिकता दी जाती थी। परिसर में पूरी तरह से एजेंट सक्रिय थे। अधिकांश काम कच्चे पर्चे पर किया जाता था। रिपोर्ट के एक–एक प्रतियां आरटीओ व काकादेव थाने को भी भेजी गई हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट के जरिए परिसर को पूरी तरह से सीसीटीवी कैमरों से लैस करने, परिसर के इंट्री प्वाइंट, सीसीटीवी व सुरक्षाकर्मी की तैनाती किए जाने, काउंटरों के अंदर भी सीसीटीवी लगवाने की सिफारिश की गई है, जिससे औचक निरीक्षण के दौरान परिसर के सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा सके। यह था पूरा प्रकरण… कानपुर आरटीओ में व्याप्त भ्रष्टाचार की मिल रही लगातार शिकायतों के चलते सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे एसडीएम सदर अनुभव सिंह और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके की संयुक्त टीम ने आरटीओ में छापेमारी की थी। पुलिस टीम ने आरटीओ परिसर के दोनों गेट बंद कर छापेमारी अभियान शुरू की। पुलिसकर्मियों ने दौड़ा–दौड़ाकर परिसर में मौजूद 22 एजेंटों को पकड़ा, जिसमें से 13 एजेंट और दो मैचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। हमीरपुर, ललपुरा थाना निवासी ट्रक चालक कामता प्रसाद ने शिकायत करते हुए बताया था कि वह जेके सीमेंट का ट्रक चलाते है, शनिवार को भरुवा से मंधना सीमेंट लादकर ले जा रहे थे। तभी भौंती बाईपास पर एआरटीओ सोमलता यादव ने उनका ट्रक रोका था। ट्रक का प्रदूषण नहीं था, एआरटीओ ने प्रदूषण, ट्रक का हॉर्न न बजने के साथ ड्राइवर का हैवी लाइसेंस होने के बावजूद 5 हजार का चालान किया था। ट्रक ड्राइवर के कहना है कि ट्रक में सीट बेल्ट नही होती, इसके बाद भी सीट बेल्ट न लगाने का जुर्माना किया गया। जिसपर कुल मिला 26,750 रुपए का चालान किया गया था। कामता ने बताया कि चालान भरने के बाद उसे 21700 की रसीद मिली, जबकि पेमेंट 26700 लिया गया था। रसीद में 5000 कम मिलने पर उसने अधिकारियों से शिकायत की लेकिन उसे भगा दिया गया, इसके बाद उसने मामले की शिकायत जिला प्रशासन से की थी। तकरीबन 3 घंटे तक चली छापेमारी के बाद पुलिस टीम सभी 22 संदिग्धों को काकादेव थाने लेकर पहुंची थी, जिसके बाद बाबू विपिन कुमार, सीनियर क्लर्क मधुर मिश्रा समेत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

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