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कानपुर नगर निगम में सामने आए टेंडर घोटाले और ठेकेदार सिंडिकेट के बाद अब भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने शासन को पत्र भेजकर मुख्य अभियंता स्तर के एक नए अधिकारी को नगर निगम में नामित करने की मांग की है। नए अधिकारी की निगरानी में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराई जाएगी। नगर निगम में लंबे समय से एक ही जगह तैनात करीब 12 अधिकारी-कर्मचारी जांच के घेरे में आ सकते हैं। इनके अलावा करीब 25 अधिकारी और कर्मचारी फिलहाल जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। जांच में अगर ठेकेदार सिंडिकेट से सांठगांठ या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो इन पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। तबादले से पहले ही रास्ता निकाल लेते थे कर्मचारी नगर निगम के कई अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात हैं। इनकी विभाग में मजबूत पकड़ है और तबादले की स्थिति बनने से पहले ही वो अपने बचाव का रास्ता निकाल लेते हैं। इसी नेटवर्क के सहारे ठेकेदार सिंडिकेट का मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा अपना प्रभाव बनाए हुए था। टेंडर में अनियमितताओं के मामले में जांच शुरू होने, फर्मों को ब्लैकलिस्ट किए जाने, एफआईआर और गिरफ्तारियों के बाद अब विभागीय स्तर पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। नगर आयुक्त ने कर्मचारियों और ठेकेदार सिंडिकेट के बीच संभावित सांठगांठ की जांच के लिए समिति गठित कर दी है, लेकिन नगर आयुक्त को आशंका है कि अधिकारियों और कर्मचारियों में से कुछ जांच को प्रभावित भी कर सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने शासन से मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी को भेजने का अनुरोध किया है। एक दिन पहले ही गठित हुई थी जांच कमेटी नगर आयुक्त ने मंगलवार को ही नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी में अपर नगर आयुक्त प्रथम को अध्यक्ष, जबकि अपर नगर आयुक्त द्वितीय और मुख्य नगर लेखा परीक्षक को सदस्य बनाया गया है। जांच में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अभियंत्रण विभाग के किसी अधिकारी को समिति में शामिल नहीं किया गया है। समिति अब ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है, जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। सूत्रों के मुताबिक फिलहाल करीब 25 अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। इनमें से करीब 12 कर्मचारी और अधिकारी ऐसे बताए जा रहे हैं, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं। इनकी तैनाती, फर्मों से संबंध, टेंडर प्रक्रिया में भूमिका और ठेकेदारों से संपर्क की पड़ताल की जाएगी। रिश्तेदारों के नाम पर कर्मचारियों ने बनाई फर्में जांच में यह भी सामने आया है कि नगर निगम के कुछ स्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर फर्में पंजीकृत करा रखी हैं। इन्हीं फर्मों के जरिए ठेकेदारी के काम में भागीदारी की जा रही थी। इस पूरे नेटवर्क में सिर्फ अभियंत्रण विभाग ही नहीं, बल्कि दूसरे विभागों के कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल हैं। अभियंताओं से लेकर बाबुओं तक की भूमिका की जांच की जा रही है। अब ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों की लिस्ट तैयार की जा रही है, जिनके खिलाफ प्रथमदृष्टया शिकायतें या साक्ष्य सामने आए हैं।
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ठेकेदार सिंडिकेट के बाद अब नगर निगम कर्मियों की बारी:25 अधिकारी-कर्मचारी रडार पर, नगर आयुक्त ने शासन से मांगा नया जांच अफसर