ऑनलाइन रजिस्ट्री के नवाचार से जुड़ा शासनादेश रद्द:अधिवक्ताओं और डीड राइटरों के विरोध के बाद लिया गया फैसला

स्टांप विभाग द्वारा ऑनलाइन रजिस्ट्री में नवाचार से जुड़ा शासनादेश सरकार ने रद्द कर दिया है। विभागीय मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि चार जून को ई-पंजीकरण मॉड्यूल के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं उसके प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में निर्देश निर्गत किए गए थे। लेकिन अधिवक्ताओं एवं डीड राइटर्स द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं के दृष्टिगत इस शासनादेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। मंत्री जायसवाल ने बताया कि यह देखा गया है कि विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, औद्योगिक विकास प्राधिकरण तथा अन्य शासकीय संस्थाएं अपनी संपत्तियों का विक्रय करती हैं। ऐसी संपत्तियों के प्रथम निबंधन हेतु वर्तमान व्यवस्था में क्रेता, उसके डीड राइटर अथवा अधिवक्ता को संबंधित प्राधिकरण से निर्धारित प्रारूप में लेखपत्र प्राप्त कर उप निबंधक कार्यालय में प्रस्तुत करना पड़ता था, जिससे समय एवं संसाधनों का अनावश्यक व्यय होता था। इस व्यवस्था को सरल एवं अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह प्रावधान किया गया था कि प्राधिकरण द्वारा विक्रय की जाने वाली संपत्तियों के प्रथम निबंधन के लिए प्राधिकरण के अधिकृत अधिकारी, क्रेता, डीड राइटर अथवा अधिवक्ता के निबंधन कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनिवार्यता समाप्त की जाए। इसके स्थान पर प्राधिकरण के कार्यालय से ही अधिकृत अधिकारी द्वारा डीड राइटर/अधिवक्ता के माध्यम से तैयार लेखपत्रों को ऑनलाइन माध्यम द्वारा संबंधित उप निबंधक कार्यालय को प्रेषित कर दिया जाएगा तथा उप निबंधक द्वारा निबंधन की कार्यवाही को तत्काल पूर्ण कर लेखपत्र को ऑनलाइन माध्यम से ही भेज दिया जाएगा। क्रेता, डीड राइटर या अधिवक्ता अपने निबंधित लेखपत्र को प्राधिकरण के कार्यालय से ही तत्काल प्राप्त कर सकेंगे। इससे समय एवं संसाधनों की बचत होगी तथा प्रक्रिया अधिक सुगम एवं पारदर्शी बनेगी। मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि नवाचार के इस प्रयास में शासनादेश में स्पष्टता न होने के कारण कई जगह अधिवक्ताओं और डीड राइटरों में यह भ्रम हो गया कि उनका रोजगार छीना जा रहा है। इस भ्रम को दूर करने तथा सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए 4 जून 2026 को जारी शासनादेश को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार अधिवक्ताओं और डीड राइटरों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विभाग द्वारा आगे भी सभी पक्षों से संवाद कर प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व सरल बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

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