ऋषभदेव जैन तीर्थ मंदिर अयोध्या में राष्ट्रीय कार्यक्रम 22 से:स्वामी रवीद्रकीर्ति बोले- भगवान ऋभवदेव के नाम से स्वागत द्वार और गैलरी बने


‘अयोध्या में जैन धर्म को उचित सम्मान मिलना चाहिए। यह हमारे पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की पावन जन्म स्थली है। इसलिए अयोध्या के स्वागत द्वारों में एक का नाम भगवान ऋषभदेव के नाम पर हो। इतना ही नहीं भगवान ऋषभदेव सहित जैन तीर्थंकरों पर आधारित आर्ट बैलरी गैलरी का भी सरकार निर्माण करें।’ यह बात जैन धर्म अयोध्या तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वामी रवींद्र कीर्ति ने कही। उन्होंने कहा- इसके लिए सीएम योगी को अनुरोध पत्र दिया जा चुका है। दिगम्बर जैन महासमिति का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित होगा
उन्होंने कहा कि इसी क्रम में 22 मार्च से विविध सामाजिक और धार्मिक आयोजनों की शुरुआत होगी। सबसे पहले जैन समाज की संसद कहे जाने वाले राष्ट्रीय संगठन दिगम्बर जैन महासमिति का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। संस्था के समाजसेवा के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इसका स्वर्ण जयंती समारोह अयोध्या की पावन धरती पर ज्ञानमती माताजी के सान्निध्य में मनाया जाएगा। 2 से 4 अप्रैल तक राष्ट्रीय स्तर का त्रिदिवसीय जैन विद्वत् सम्मेलन इस अवसर पर महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बड़जात्या (इंदौर), महामंत्री विपिन जैन (मेरठ) सहित देशभर की इकाइयों के हजारों पदाधिकारी और सदस्य भाग लेंगे। सम्मेलन को “जैन एकता सम्मेलन” नाम दिया गया है। जिसका उद्देश्य समाज की संगठनात्मक शक्ति को मजबूत करना है।इसके बाद 2 से 4 अप्रैल 2026 तक राष्ट्रीय स्तर का त्रिदिवसीय जैन विद्वत् सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। प्राचीन ग्रंथों की 16 पुस्तकों पर गहन अध्ययन और चिंतन इसमें जैन धर्म के प्राचीन ग्रंथों और सिद्धांतों पर विद्वानों के बीच विचार-विमर्श होगा। प्रथम शताब्दी में आचार्य धरसेनाचार्य तथा उनके शिष्य आचार्य पुष्पदंत और भूतबली द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथों की 16 पुस्तकों पर गहन अध्ययन और चिंतन किया जाएगा। इस ग्रंथ पर गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी द्वारा की गई संस्कृत टीका पर भी विद्वानों के बीच चर्चा होगी। सम्मेलन में जैन गणित के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध के लिए इंदौर विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापक एवं गणित विभागाध्यक्ष डॉ. प्रगति जैन को महावीराचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान के अंतर्गत उन्हें 51 हजार रुपये की राशि भी प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम में प्रो. निलेश कुमार जैन (पूर्व निदेशक एवं आचार्य, आईआईटी इंदौर), प्रो. राजीव कुमार जैन (पूर्व कुलपति, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर), प्रो. रेणु जैन (पूर्व कुलगुरु, इंदौर विश्वविद्यालय) तथा प्रो. आनंद वर्धन शर्मा (निदेशक, यूजीसी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहेंगे। इस समग्र कार्यक्रम का आयोजन तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ के अध्यक्ष डॉ. अनुपम जैन (इंदौर) के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिसमें देशभर से सैकड़ों विद्वानों के शामिल होने की संभावना है।
इसके साथ ही 4 अप्रैल 2026 को वैशाख कृष्ण द्वितीया के अवसर पर पूज्य ज्ञानमती माता की दीक्षा हीरक जयंती महोत्सव भक्तिमय वातावरण में मनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि माताजी का जन्म 1934 में हुआ था। उन्होंने 1952 में गृह त्याग किया, 1953 में प्रथम दीक्षा और 1956 में आर्यिका दीक्षा ग्रहण कर ज्ञानमती माताजी के रूप में आध्यात्मिक जीवन को समर्पित किया। वहीं 5 अप्रैल को अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद का स्वर्ण जयंती समारोह और अवार्ड समर्पण कार्यक्रम भी आयोजित होगा। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवन प्रकाश जैन के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह में देशभर से हजारों युवा शामिल होंगे। इस दौरान देश की तीन शाखाओं को आउटस्टैंडिंग, एक्सलेंट और बेस्ट शाखा अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा, जबकि पिछले 50 वर्षों में परिषद को सहयोग देने वाले वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को सेवाशिरोमणि सम्मान प्रदान किया जाएगा। इन आयोजनों के माध्यम से जैन तीर्थ अयोध्या में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए समाज के हर वर्ग—वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, परिवारजनों, विद्वानों, युवाओं और महिलाओं को जोड़ते हुए धर्म और समाज विकास की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

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