उर्सला अस्पताल के डॉक्टर से बालिका की हड्‌डी टूटी:कानपुर में इम्प्लांट के दौरान केस बिगड़ने का आरोप, हैलट में हुई दोबारा सर्जरी


कानपुर के जाजमऊ की 15 वर्षीय रिमशा खान चार साल पहले सीढ़ियों से गिर गई थी। उसकी जांघ की हड्डी टूट गई थी। उर्सला अस्पताल में ऑपरेशन कर इम्प्लांट लगाया गया था। आरोप है कि करीब चार साल बाद इम्प्लांट निकलवाने के लिए दोबारा उर्सला पहुंची तो डॉक्टर की लापरवाही से हड्‌डी फिर टूट गई। परिजन करीब 20 दिन तक बच्ची को हैलट अस्पताल में लेकर इलाज कराते रहे। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने जटिल सर्जरी कर पुराना इम्प्लांट निकाला और क्षतिग्रस्त हड्डी को ठीक किया। फिलहाल रिमशा की हालत में सुधार है। अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरी खबर… जाजमऊ पुरानी चुंगी निवासी रिमशा के पिता मोहम्मद नफीस ने बताया कि वह 4 तारीख को बेटी को लेकर उर्सला अस्पताल पहुंचे थे। इम्प्लांट निकालने के लिए 7 तारीख को ऑपरेशन शुरू किया गया। नफीस का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर उत्तम की लापरवाही से रिमशा की जांघ की हड्डी दोबारा टूट गई। आरोप है कि इसके बाद भी परिवार को इसकी सही जानकारी नहीं दी गई और बच्ची को करीब 15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रखा गया। 15 दिन तक भर्ती रखने का आरोप नफीस का कहना है कि उर्सला में भर्ती रहने के दौरान बच्ची को केवल ग्लूकोज चढ़ाया जाता रहा। परिवार के मुताबिक, किसी वरिष्ठ या बाहरी विशेषज्ञ ने बच्ची को नहीं देखा। हालत में सुधार नहीं होने पर बाद में उसे जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर (हैलट) अस्पताल रेफर कर दिया गया। हालांकि, उर्सला अस्पताल या संबंधित डॉक्टर का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है। हैलट में विशेषज्ञों ने किया जटिल ऑपरेशन हैलट पहुंचने के बाद अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय कुमार और उनकी टीम ने बच्ची की जांच की। मामले को चुनौतीपूर्ण मानते हुए उसे भर्ती किया गया। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, डॉ. रत्नेश, डॉ. अरीबा, डॉ. आकांक्षा और डॉ. प्रशांत की टीम की मदद से सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने पुराना इम्प्लांट निकालने के साथ क्षतिग्रस्त हड्डी की भी सर्जरी की। सर्जरी के बाद बच्ची की हालत में सुधार बताया जा रहा है। वह डॉक्टरों की निगरानी में है। ‘डेढ़ महीने से काम बंद, नुकसान की भरपाई कौन करेगा’ रिमशा के पिता मोहम्मद नफीस जाजमऊ की एक चमड़ा फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। वह परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य हैं। परिवार में पत्नी नईमा बेगम और तीन बच्चे अयान, रिमशा और छोटा बेटा आहत हैं। नफीस के मुताबिक, बेटी के इलाज के चलते उनका काम-धंधा करीब डेढ़ महीने से बंद है। दो छोटे बच्चों की देखभाल दादा-दादी के भरोसे है। उन्होंने कहा, ‘हैलट में डॉ. संजय कुमार और उनकी टीम ने हमारी बच्ची को नया जीवन दिया। यहां इलाज बहुत अच्छा रहा। लेकिन उर्सला में डॉक्टर की लापरवाही से जो नुकसान हुआ और बच्ची ने जो दर्द सहा, उसकी भरपाई कौन करेगा?’

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