उन्नाव में गंगा खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर:30 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में, सैकड़ों घरों में घुसा पानी, लोग छतों पर रहने को मजबूर


उन्नाव में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को 24 घंटे में नदी का जलस्तर पांच सेंटीमीटर बढ़ गया। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, शुक्रवार शाम 6 बजे गंगा 113.070 मीटर पर थी, जो शनिवार शाम बढ़कर 113.120 मीटर हो गई। खतरे का निशान 113 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से शहर और ग्रामीण क्षेत्र के 30 से ज्यादा मोहल्ले और गांव बाढ़ की चपेट में हैं। चंपापुरवा, मनसुख खेड़ा, तेजीपुरवा, इंद्रा नगर, रविदास नगर, श्रीनगर, अवस्थी फार्म हाउस, गायत्री नगर, भातू फार्म और ठाकुर खेड़ा में सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है। कई इलाकों में घरों के आसपास कई फीट पानी भरने से लोग नाव के सहारे आवाजाही कर रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में 71 नावें लगाई हैं। घरों में घुसा पानी, नाव से हो रही आवाजाही सरैयां, लक्ष्मी खेड़ा, रजवा खेड़ा, पीपरखेड़ा डेरा, निहालखेड़ा, पोनी, अखलॉक नगर, रतीरामपुरवा, गड़रियन पीपरखेड़ा, गजिया खेड़ा और त्रिभुवनखेड़ा समेत कई गांव भी बाढ़ से प्रभावित हैं। पानी बढ़ने के साथ कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। हालांकि, कुछ लोग घर का सामान और पशुओं को छोड़ने के डर से छतों पर ही रुके हुए हैं। छतों पर डेरा, राहत सामग्री का इंतजार बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि अब तक ज्यादातर परिवारों तक राहत सामग्री नहीं पहुंची है। खाने-पीने के सामान के साथ पशुओं के चारे की भी दिक्कत बढ़ रही है। जलभराव के कारण कई परिवार घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं। कुछ लोग खुले आसमान के नीचे भी रात गुजार रहे हैं और गंगा का पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं। राहत शिविर जाने में भी लोगों को डर ग्रामीणों और नगरवासियों का कहना है कि राहत शिविरों में जाने पर घर में रखा सामान और पशुओं की सुरक्षा की चिंता रहती है। इसी वजह से कई परिवार घर छोड़ने के बजाय वहीं छतों पर रह रहे हैं। प्रशासन की ओर से आवाजाही के लिए नावें लगाई गई हैं, लेकिन बढ़ते पानी के बीच लोगों की परेशानी बनी हुई है। दूषित पानी से बीमारी का खतरा बाढ़ का पानी हैंडपंपों तक पहुंचने से पेयजल दूषित होने का खतरा बढ़ गया है। प्रभावित इलाकों में साफ पानी और भोजन की कमी के साथ पशुओं के चारे की समस्या भी सामने आ रही है। जलभराव के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा है। लोगों ने प्रशासन से पर्याप्त राहत सामग्री, स्वच्छ पेयजल, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

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