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रायबरेली। जनपद न्यायालय ने वर्ष 2019 के चर्चित आदित्य हत्याकांड में फैसला सुनाते हुए 14 अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दो अभियुक्तों को बरी कर दिया गया। घटना 9/10 अगस्त 2019 की रात की है। अभियुक्तों ने रवि उर्फ आदित्य का रातापुर चौराहे से करीब छह किलोमीटर तक पीछा किया था। इसके बाद गढ़ी खास गोदाम के पास उसे घेर लिया गया और उसकी हत्या कर दी गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और साक्ष्य जुटाकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। 2022 तक चलती रहीं आरोपियों की अर्जियां पुलिस जांच पूरी होने के बाद मामले का विचारण न्यायालय में शुरू हुआ। वर्ष 2022 तक अभियुक्तों की ओर से अलग-अलग अर्जियां दाखिल की जाती रहीं, जिनका न्यायालय ने निस्तारण किया। 16 सितंबर 2022 को आरोप तय किए जाने थे। इसी दौरान एक अभियुक्त ने कार्रवाई से बचने के लिए अस्पताल में भर्ती होने का हवाला दिया। बाद में उसके खिलाफ भी आरोप तय कर दिए गए। अंतिम निर्णय के स्तर पर दो बार पहुंचा मामला मामले की सुनवाई के दौरान दो बार प्रकरण अंतिम निर्णय के स्तर तक पहुंचा। इसी बीच बचाव पक्ष ने तत्कालीन मिल एरिया थाना प्रभारी राजकुमार पांडे और उनके हमराहियों को बचाव साक्षी के रूप में पेश करने की मांग करते हुए याचिकाएं दाखिल कीं। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज निचली अदालत ने बचाव पक्ष की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद उच्च न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन थाना प्रभारी और उनके हमराहियों के बयान बचाव साक्षी के तौर पर दर्ज किए गए। इन प्रक्रियाओं के चलते मामले की सुनवाई आगे बढ़ती रही। जनपद न्यायाधीश के तबादले से भी टला था फैसला मामला अंतिम निर्णय के करीब पहुंचने के बाद तत्कालीन जनपद न्यायाधीश का स्थानांतरण हो गया। इसके कारण फैसला एक बार फिर टल गया। अब न्यायालय ने मामले में 14 अभियुक्तों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि दो अभियुक्तों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
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आदित्य हत्याकांड में 14 दोषियों को उम्रकैद:दो साक्ष्य के अभाव में बरी, 2019 में 6 किमी पीछा कर की थी हत्या