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आजमगढ़ जिले के डीएम रविंद्र कुमार के निर्देश पर देव आनंद संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय शनिचरा रामगढ़ के विरुद्ध हेरा फेरी के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में डॉक्यूमेंट में हेरा फेरी किए जाने का आरोप लगा है। पत्रावली का अवलोकन करने पर पाया गया कि प्रबंधन देवानंद संस्कृत विद्यालय के अनुमन्यता विषयक पत्र दिनांक 8.10.2024 में हेरा-फेरी करने का संज्ञान 28.02.2026 को होने के पश्चात पत्रावली का अवलोकन करने पर पाया गया कि प्रबन्धक श्री देवानन्द संस्कृत उमावि दानशनिचरा रामगढ़, आजमगढ़ के अनुमन्यता विषयक पत्र दिनांक 8.10.2024 (संलग्नक-01) की प्रति पत्रावली में उपलब्ध है, जिस पर रिसीट नं0-863 पड़ा है परन्तु तत्कालीन अधिकारी द्वारा इसे मार्क नहीं किया गया है। इस विषय पर प्रबन्धक के हस्ताक्षर से मूल पत्र जानकारी में आया है जो उसी पत्रांक एवं दिनांक पर (संलग्नक-2) जो कार्यालय सहायक विजय कुमार यादव द्वारा रिसीव किया गया है। विजय कुमार यादव द्वारा यह कहा गया कि हमने जो पत्र रिसीव किया उसे तत्कालीन अधिकारी से हस्ताक्षर कराकर उस पर रिसीट नम्बर चढ़ाकर सम्बन्धित सहायक विधिचन्द यादव को दिया गया। पत्रावली में बिना मार्किंग के जो पत्र संलग्न है उसमें (1) रिंकी यादव प्रधानाचार्य (2) कमलेश राय सअ (3) वेद प्रकाश मिश्र (4) संजय कुमार मिश्र सअ (5) सयोगिता मिश्र सहित कुल 5 लोगों का नाम अंकित है। जिस पत्र को रिसीट सहायक विजय कुमार यादव द्वारा सम्बन्धित पटल सहायक विधिचन्द यादव को प्राप्त कराना बताया गया उसमें (1) कमलेश राय प्रभारी प्रधानाचार्य (2) वेद प्रकाश मिश्र (3) संजय मिश्र (4) संयोगिता मिश्रा सहित कुल 4 लोगों का नाम है। जिस पत्र में कुल 4 लोगों का नाम है वह पत्र पत्रावली में संलग्न नहीं है। जिससे यह संदेह उत्पन्न हो रहा है कि इस विद्यालय का कार्य देखने वाले तत्कालीन पटल प्रभारी विधिचन्द यादव द्वारा मूल पत्र को गायब करके उसी पत्रांक व दिनांक पर एक नया पत्र बिना अधिकारी के मार्किंग के पत्रावली में लगा दिया गया। संस्कृत विद्यालयों का कार्य विधिचन्द यादव प्रधान सहायक से हट जाने के बाद नवीन पटल सहायक राम बचन यादव को श्री देवानन्द संस्कृत उमावि दानशनिचरा रामगढ़, आजमगढ़ की पत्रावली दी गयी। पत्रावली में उपलब्ध 5 लोगों के नाम वाला नकली पत्र का उल्लेख करते हुए शिक्षा निदेशक (मा) उप्र. शिक्षा सामान्य (2) विस्तार अनुभाग, प्रयागराज को आख्या दिनांक 29.11.2025 को चली गयी।
तत्कालीन प्रभारी विधि चंद यादव से की गई पूछताछ
मामले का संज्ञान में आने पर
5-संज्ञान में आने पर 28 फरवरी 2026 को रिसीट सहायक विजय कुमार यादव और तत्कालीन प्रभारी विधिचन्द्र यादव से पूछताछ की गयी, जिसमें विधिचन्द यादव द्वारा मौखिक रूप से बताया गया कि रिसीट सहायक के हस्ताक्षर से 4 नाम वाला पत्र उनके द्वारा प्राप्त किया गया और वही पत्रावली में संलग्न किया गया। जब विधिचन्द यादव द्वारा व्यहरित और टाईप किया हुआ पत्र उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया और यह पूछा गया कि जब 5 नाम वाले पत्र आपने संलग्न नहीं किया था तब इस 5 नाम वाले पत्र में उल्लिखित रिकी यादव के नाम का उल्लेख आपके द्वारा उक्त टाईप पत्र में किस आधार पर किया गया। उक्त प्रश्न पर वह कुछ बता नहीं पाये। तब इस विषय पर लिखित उत्तर दिनांक 28.02 2026 (संलग्नक-3) के पत्र द्वारा मांगा गया तो उन्होंने मेरे समक्ष दिये गये उक्त मौखिक बयान को पलटते हुए दिनांक 28.02 2026 को अपना लिखित उत्तर (संलग्नक-4) यह दिया गया कि कार्यरत डाक सहायक द्वारा पत्र दिनांक 08.10.2024 जिसमें कुल 5 नाम अंकित है. मुझे प्राप्त कराया गया है और इसे मेरे द्वारा तत्समय ही पत्रावली में संलग्न कर दिया गया। इस 5 नाम वाले पत्र पर डाक सहायक श्री विजय कुमार यादव का हस्ताक्षर नहीं है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह पत्र डाक सहायक विजय कुमार यादव द्वारा नहीं प्राप्त कराया गया है। 7- डाक सहायक विजय कुमार यादव द्वारा मूल पत्र जो प्राप्त कराया। यह कार्य तत्कालीन पटल प्रभारी विधिचन्द यादव द्वारा किया जाना अभिलेखों से पुष्टित है। ऐसे में तत्कालीन पटल प्रभारी सहित पांच लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है।
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आजमगढ़ में पांच लोगों के विरुद्ध दर्ज हुआ मुकदमा:सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ करने का आरोप, जांच में जुटी पुलिस