अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका मंजूर:कोर्ट ने शांतनु भारतीया को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज निवासी शांतनु भारतीया की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने पाया कि पुलिस ने गिरफ्तारी में संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया। क्या है पूरा मामला जानिये याचिकाकर्ता शांतनु भारतीया को 25 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे उनके सदर बाजार, आनंद बाग, थाना कैंट, प्रयागराज स्थित आवास से सादी वर्दी में आए अज्ञात लोगों ने उनकी माँ के सामने उठा लिया। गिरफ्तारी करने वाला वाहन बिना नंबर प्लेट का था। न तो गिरफ्तारी का कारण बताया गया और न ही कोई गिरफ्तारी मेमो बनाया गया। इसके बाद परिवार उनकी तलाश करता रहा, लेकिन पुलिस ने कोई जानकारी नहीं दी। माँ ने थाना कैंट में गुमशुदगी की शिकायत देनी चाही, मगर वह दर्ज नहीं की गई। बड़े भाई ने ई-एफआईआर दर्ज कराई। गिरफ्तारी के बाद शाम 7:55 बजे थाना सिविल लाइंस में बी एन एस की धारा 326(जी) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4 के तहत एफआईआर दर्ज की गई यानी गिरफ्तारी के बाद एफआईआर दर्ज की गई। कोर्ट ने कई पहलुओं पर विचार किया कोर्ट ने पाया कि इस गिरफ्तारी में कई गंभीर उपबंधो का उल्लंघन किया गया। कोर्ट ने कहा अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन किया गया। शांतनु को वकील से मिलने का अधिकार नहीं बताया गया और न परिवार को सूचित किया गया। 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश न करना अनुच्छेद 22(2) और बी एन एस एस की धारा 58 का उल्लंघन किया गया। गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी का स्थान स्पष्ट नहीं था। डी के बासु बनाम पश्चिम बंगाल (1997) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया। गिरफ्तारी मेमो में स्वतंत्र स्थानीय गवाह नहीं थे। रिमांड मजिस्ट्रेट ने 27 मई 2026 का रिमांड आदेश बिना विवेक का इस्तेमाल किए पास किया। हाईकोर्ट ने शांतनु की गिरफ्तारी और हिरासत को अवैध घोषित करते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक हो तो सरकार कानून के अनुसार नए सिरे से कार्रवाई कर सकती हैं।

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