UP Gangster Act Explained; SC Vs Allahabad HC – MCOCA GUJSITOK Law

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क मुख्तार अंसारी के रिश्तेदारों की संपत्तियां रिलीज कर दीं। एक अन्य मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट को ‘स्टिलबॉर्न’ (पैदा होते ही मर जाना) यानी ‘मरा हुआ कानून’ बताया। महाराष्ट्र के ‘मकोका’ और

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आज यूपी एक्सप्लेनर में पढ़िए, आखिर किस कानूनी पेंच की वजह से प्रॉपर्टी रिलीज कर दी गईं? गैंगस्टर एक्ट किस वजह से कमजोर है और सरकार इसमें क्या बदलाव कर सकती है…

सवाल-1: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार के रिश्तेदारों की संपत्तियां क्यों रिलीज कीं?

जवाब: इसे दो हिस्सों में समझेंगे। सबसे पहले जानेंगे कि कौन सी संपत्तियां रिलीज हुईं और ये किसके नाम थीं…

1. सितंबर, 2026: लखनऊ के डालीबाग में करीब ₹2.5 करोड़ कीमत का बंगला।

मुख्तार की भाभी फरहत अंसारी (सपा सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी) के नाम।

गाजीपुर के तत्कालीन डीएम ने अक्टूबर, 2022 में कुर्क किया।

2. अगस्त, 2026: गाजीपुर के माचा और शकरपुर मौजा में करीब 25 बीघा खेत, बाग और फार्महाउस (कीमत करीब ₹12 करोड़)।

भतीजी नुसरत, नूरिया व मारिया और भाभी फरहत अंसारी के नाम, 2022 में कुर्क।

3. मार्च, 2026: गाजीपुर में करीब ₹28 लाख कीमत की 18 दुकानें।

चचेरे भाई मंसूर अंसारी के नाम, मार्च 2023 में कुर्क।

तस्वीर नवंबर, 2022 की है। गाजीपुर प्रशासन मुख्तार के चचेरे भाई मंजूर की संपत्ति कुर्क करने पहुंचा था।

तस्वीर नवंबर, 2022 की है। गाजीपुर प्रशासन मुख्तार के चचेरे भाई मंजूर की संपत्ति कुर्क करने पहुंचा था।

अब समझते हैं संपत्तियां किस वजह से रिलीज हुईं…

  • गैंगस्टर एक्ट (यूपी गैंगस्टर्स एंड एंटी सोशल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट, 1986) की धारा 14 के तहत DM बिना किसी मुकदमे या अपराध साबित हुए भी शुरुआती जांच और पुलिस रिपोर्ट के आधार पर संपत्ति कुर्क कर सकता है।
  • एक्ट के मुताबिक DM के पास ‘विश्वास करने का कारण’ होना चाहिए कि चल/अचल संपत्ति अपराध के पैसों से बनी है। ‘विश्वास का कारण’ क्या होगा, यह साफ नहीं है।
  • वहीं, कोर्ट में साबित करना होता है कि अपराध की तारीख, उससे हुई अवैध कमाई और संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल हुए पैसों में सीधा संबंध है। इसे ‘मनी ट्रेल’ कहते हैं। इन सभी मामलों में पुलिस ये संबंध साबित नहीं कर पाई।
सपा सांसद अफजाल अंसारी ने तस्वीर 2 सितंबर, 2026 को लखनऊ स्थित बंगले का कब्जा लिया।

सपा सांसद अफजाल अंसारी ने तस्वीर 2 सितंबर, 2026 को लखनऊ स्थित बंगले का कब्जा लिया।

सवाल-2: सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट में किस तरह की कानूनी खामियां बताईं?

जवाब: 21 अगस्त, 2026 को एक मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एक्ट पर कई गंभीर टिप्पणियां कीं। साथ ही तकनीकी रूप से कमजोर होने के कारण बताए…

  • अपराध की परिभाषा साफ नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कानून में जिन अपराधों का जिक्र है, वे पहले ही IPC और BNS के तहत दंडनीय हैं। ऐसे में यह कानून कोई अलग अपराध परिभाषित नहीं करता, अपराधी को ‘गैंगस्टर’ घोषित करके सजा देता है। यह इसकी सबसे बड़ी खामी है। हिंसा रोकने के नाम पर बनाया गया यह कानून कई मामलों में निर्दोष के खिलाफ हिंसा और दमन को बढ़ावा देता दिखता है।
  • बिना फैसले के अपराधी मानना: कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट की धाराएं लगते ही व्यक्ति की गिरफ्तारी, लंबी न्यायिक हिरासत, मुकदमा और सजा तक का रास्ता खुल जाता है। ऐसे में मुकदमा सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाता है और फैसला पहले से तय दिखाई देता है। व्यक्ति बदनाम होता है और लोग उसे दोषी मानने लगते हैं।
  • सामान्य सिद्धांत के खिलाफ: सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता के मुताबिक मकोका या अन्य केंद्रीय कानूनों में संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई अपराध साबित होने के बाद होती है। वहीं, गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा शुरू होने से पहले ही केवल FIR में एक्ट की धाराएं लगने पर संपत्ति कुर्क हो सकती है। कुर्की से पहले आरोपी या संपत्ति के मालिक को नोटिस नहीं दिया जाता। साथ ही मालिक को ही साबित कराना होता है कि संपत्ति ‘अवैध’ नहीं है। यह कानून के सामान्य सिध्दांत के खिलाफ है।
  • क्राइम नेटवर्क साबित करने का ढीला पैमाना: महाराष्ट्र-गुजरात का कानून क्राइम नेटवर्क (गिरोह) की गैरकानूनी गतिविधि पर लगातार नजर रखता है। जबकि गैंगस्टर एक्ट छोटे-मोटे या व्यक्तिगत अपराधियों पर भी लगा दिया जाता है। इससे यह ‘संगठित अपराध’ से निपटने के मूल उद्देश्य से भटक जाता है। 21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के एक मामले में फैसला सुनाया था।

सवाल-3: गैंगस्टर एक्ट, महाराष्ट्र-गुजरात के कानून से किस तरह कमजोर है?

जवाब: महाराष्ट्र के मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट, 1999) और गुजरात के गुजसीटॉक (गुजरात कंट्रोल ऑफ टेरेरिज्म एंड ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट, 2019) से तुलना करने पर से पता चलता है…

सवाल-4: सरकार गैंगस्टर एक्ट में किस तरह के बदलाव कर सकती है?

जवाब: कानून में संशोधन का आधिकारिक ड्रॉफ्ट अभी सामने नहीं आया है। हालांकि, कोर्ट के हालिया फैसलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता इन बदलावों की संभावना जताते हैं…

खामी 1: अपराध की साफ परिभाषा

तकनीकी बिंदु: कानून में साफ बताना जरूरी है कि कौन-सा ‘कृत्य’ अपराध है। गैंगस्टर एक्ट की धारा 2(b) और 2(c) सिर्फ ‘गैंग’ और ‘गैंगस्टर’ के बारे में बताती है, यानी यह एक ‘स्टेटस’ है, कृत्य नहीं।

असर: पुलिस आरोपी को ‘गैंगस्टर’ घोषित करके FIR दर्ज कर सकती है, भले ही कोई ठोस या साबित होने योग्य आरोप न हो।

संभावित सुधार: धारा 2 में बदलाब करके साफ तौर पर बताया जाएगा (क) कौन-सा कृत्य अपराध है, (ख) उसके लिए न्यूनतम कितनी घटनाएं/FIR जरूरी हैं ताकि ‘निरंतरता’ साबित हो।

खामी 2: संपत्ति कुर्की के मानक

तकनीकी बिंदु: मौजूदा प्रक्रिया में DM किसी संपत्ति को ‘बेनामी’ या ‘गैंगस्टर गतिविधि से अर्जित’ घोषित करके कुर्क कर सकता है।

असर: कानूनी सिद्धांत के मुताबिक अपराधिक संपत्ति साबित करने का जिम्मा अभियोजन (पुलिस)पर होता है, आरोपी पर नहीं कि वह बेगुनाही साबित करे। मौजूदा प्रक्रिया इसके उलट है।

संभावित सुधार: (क) कुर्की आदेश जारी करने से पहले DM को एक ‘प्रारंभिक साक्ष्य रिपोर्ट’ दर्ज करनी अनिवार्य हो सकती है, जिसमें संपत्ति और अपराध के बीच पैसों का सीधा संबंध (मनी ट्रेल) दिखे।

(ख) अगर तय समय सीमा में ठोस सबूत न मिलें, तो कुर्की स्वतः रद्द होने का प्रावधान जोड़ा जा सकता है।

खामी 3: सिर्फ रिश्तेदारी को आधार बनाना

तकनीकी बिंदु: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कहा कि केवल आरोप या अपराधी से रिश्तेदारी के आधार पर कुर्की नहीं की जा सकती।

संभावित सुधार: माफिया अक्सर अपने ड्राइवरों, नौकरों या रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदते हैं। नए संशोधन में ऐसी ‘बेनामी’ संपत्तियों को जब्त करने के लिए इनकम टैक्स और बेनामी संपत्ति अधिनियम के साथ कोऑर्डिनेशन का कानूनी रास्ता बनाया जा सकता है।

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