यूपी में इस बार विधानसभा चुनाव जमीन से ज्यादा मोबाइल पर लड़ा जाएगा। लोग नेताओं के लंबे भाषणों से ज्यादा रील्स, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुद्दों को समझ रहे हैं।
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दिल्ली में 6 जून से 25 जुलाई तक चले जेन-जी प्रोटेस्ट के बाद सोशल मीडिया की राजनीतिक ताकत और ज्यादा दिखाई दे रही है। इसी वजह से भाजपा, सपा और बसपा ने सोशल मीडिया पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसके पीछे की 3 वजह समझिए-
- SIR के बाद प्रदेश में कुल 13.39 करोड़ मतदाता हैं। इनमें से 12.28 करोड़ के पास स्मार्टफोन है।
- मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के मुताबिक, शहरी इलाकों में करीब 90% और ग्रामीण इलाकों में 65% मतदाताओं के पास स्मार्टफोन है।
- सोशल मीडिया एक्सपर्ट अनूप मिश्रा के अनुसार, एक आम वोटर रोजाना औसतन 4-5 घंटे सोशल मीडिया पर बिता रहा है।

अब पार्टी के ऑफिशियल हैंडल्स का हाल जानिए
1. भाजपा (यूपी) : फॉलोअर्स ज्यादा, लेकिन रूटीन पोस्ट पर रीच कम
- X (ट्विटर)- 26 जुलाई से 10 सितंबर तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो @BJP4UP हैंडल की सामान्य पोस्ट 5 हजार से 40 हजार व्यूज तक सिमट जाती हैं। हालांकि, अखिलेश यादव और राहुल गांधी के खिलाफ पोस्ट बेहतर प्रदर्शन करती हैं। 6 सितंबर की ‘The Priest King’ वीडियो पोस्ट पर 7.49 लाख व्यूज मिले।
- फेसबुक व इंस्टाग्राम- फेसबुक पेज पर अमूमन 100 से 300 रिएक्शंस मिलते हैं। इंस्टाग्राम पर भी 90% से ज्यादा पोस्ट 1 लाख से कम व्यूज पर रह जाती हैं। भाजपा का सबसे बड़ा और असरदार डिजिटल चेहरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं।
2. सपा : कम फॉलोअर्स के बावजूद रीच मजबूत
- X (ट्विटर)- प्रेस रिलीज और सरकारी बयानों वाली पोस्ट 4 हजार से 12 हजार व्यूज तक सीमित रहती हैं, लेकिन अखिलेश से जुड़े वीडियो 15 हजार से 45 हजार व्यूज पा लेते हैं। ये आंकड़े 26 जुलाई से लेकर 10 सितंबर के बीच के हैं।
- फेसबुक व इंस्टाग्राम- फेसबुक पर अखिलेश के भाषणों की क्लिप को 9,600 से 36 हजार तक लाइक्स मिलते हैं। इंस्टाग्राम पर सपा के फॉलोअर्स भाजपा से कम हैं, लेकिन प्रति पोस्ट औसतन लाइक्स ज्यादा हैं।
3. बसपा : X पर मायावती की सीधी पकड़
- X (ट्विटर)- @bspindia हैंडल सिर्फ मायावती के पोस्ट रीट्वीट करता है। इसकी रीच 100 का आंकड़ा भी पार नहीं करती।
- फेसबुक व इंस्टाग्राम- हमें बसपा का ऑफिशियल फेसबुक पेज नहीं मिला। हालांकि, इंस्टाग्राम पर औसतन 7 दिन में एक पोस्ट आती है। आकाश आनंद और मायावती से जुड़े पोस्ट पर 5 हजार से 15 हजार तक लाइक्स मिल जाते हैं।

अखिलेश का एंगेजमेंट मजबूत, मायावती की X पर पकड़
1. योगी आदित्यनाथ- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहुंच तीनों नेताओं में सबसे ज्यादा दिखती है। उनके राजनीतिक बयानों, विकास परियोजनाओं और सांस्कृतिक मुद्दों से जुड़े पोस्ट पर लाखों-करोड़ों व्यूज मिलते हैं। 7 सितंबर की इंस्टाग्राम पोस्ट को 1.2 करोड़ से ज्यादा व्यूज और 10 लाख से ज्यादा लाइक्स मिले।
2. अखिलेश यादव- सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ज्यादातर पोस्ट 1 लाख से ज्यादा व्यूज हासिल कर रही हैं। हालांकि, फोटो और छोटी अपडेट वाली पोस्ट पर सिर्फ 3 हजार से 18 हजार व्यूज आते हैं। वहीं, इंस्टाग्राम पर उनकी रील्स और वीडियो लाखों-करोड़ों व्यूज तक पहुंच रहे हैं।
3. मायावती- बसपा सुप्रीमो मायावती की सबसे मजबूत पकड़ X पर दिखाई देती है। 1 से 10 सितंबर के बीच उनके बयान वाली ज्यादातर पोस्ट पर 1 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। वहीं, 6 सितंबर की एक इंस्टाग्राम पोस्ट ने 10 लाख से ज्यादा व्यूज हासिल किए।
भाजपा-सपा अपनी रीच कैसे बढ़ा रहे, क्या है स्ट्रैटजी
भाजपा का 30 सेकेंड की रील्स पर फोकस
10 सितंबर को लखनऊ में भाजपा आईटी सेल के राष्ट्रीय संयोजक दीपक म्हस्के ने प्रदेश टीम के साथ बड़ी बैठक की। भाजपा की भावी रणनीति इस प्रकार है-
- जनता अब पूरे भाषण नहीं देखती। इसलिए नेताओं के भाषणों के चुनिंदा और तीखे अंशों की रील्स बनाकर वायरल की जाएंगी।
- भाजपा ने डिजिटल इंफ्लुएंसर्स की एक बड़ी टीम तैयार की है। उनकी रीच और फॉलोअर्स के हिसाब से पेमेंट किया जा रहा है।
- पार्टी ने माना है कि विपक्ष नैरेटिव सेट करने में आगे निकल रहा था। अब जिला स्तर तक नई आईटी टीम बनाई जा रही है, जो अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए बिना सपा और कांग्रेस को उसी की शैली में जवाब देगी।
सपा रियल टाइम रिस्पॉन्स में जुटी
सपा की सोशल मीडिया टीम पार्टी मुख्यालय (लखनऊ) से संचालित होती है और हर जिले में इसके पदाधिकारी तैनात हैं।
- प्रदेश में कहीं भी कोई घटना होती है, तो स्थानीय टीम तुरंत उसकी जानकारी और वीडियो लखनऊ टीम को भेजती है।
- सपा, सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ती। अखिलेश के आधिकारिक पेजों के जरिए सीधे आक्रामक नैरेटिव सेट करती है।
सोशल मीडिया केवल प्रचार नहीं, दावों की परीक्षा भी
सोशल मीडिया एक्सपर्ट अनूप मिश्रा कहते हैं- “2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में डिजिटल कंटेंट की भूमिका सबसे निर्णायक होगी। जेन-जी हर वादे और दावे की हकीकत सोशल मीडिया पर परख रहा है। अगर किसी मुद्दे को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समर्थन मिलता है, तो वह टीवी और अखबारों का एजेंडा बन जाता है।”

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