SRN-अस्पताल में पहली बार UBE-तकनीक एंडोस्कोपिक सर्जरी से रीढ़ की:24 घंटे में चलने लगा मरीज, छोटे चीरे से हुआ ऑपरेशन


मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल ने रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। न्यूरोसर्जरी विभाग में पहली बार यूनिलेटरल बायपोर्टल एंडोस्कोपी (UBE) तकनीक के माध्यम से स्लिप डिस्क (लम्बर पीआईवीडी) और स्पाइनल कैनाल स्टेनोसिस का सफल ऑपरेशन किया गया। इस आधुनिक तकनीक के जरिए मरीज का ऑपरेशन बेहद छोटे चीरे से किया गया, जिससे उसे कम दर्द और तेजी से रिकवरी का लाभ मिला। न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि UBE रीढ़ की सर्जरी की नवीनतम मिनिमली इनवेसिव तकनीकों में शामिल है। इसमें एंडोस्कोप की सहायता से छोटे-छोटे चीरे लगाकर ऑपरेशन किया जाता है, जिससे मांसपेशियों को न्यूनतम क्षति पहुंचती है। हाई-डेफिनिशन दृश्यता और बेहतर मैग्निफिकेशन के कारण सर्जरी अधिक सटीक और सुरक्षित होती है। इस तकनीक से मरीज को कम रक्तस्राव, संक्रमण का कम खतरा और जल्दी स्वस्थ होने का लाभ मिलता है। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक रही। ऑपरेशन के महज 24 घंटे के भीतर मरीज चलने-फिरने लगा, जबकि 48 घंटे के भीतर उसे अस्पताल से छुट्टी देने की तैयारी की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक रीढ़ की बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी। इस सफल ऑपरेशन को डॉ. एन. एन. गोपाल और डॉ. पंकज गुप्ता के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। सर्जिकल टीम में डॉ. यतीश जोशी (एसआर-2), डॉ. अभिलाष पाल (जेआर-2) तथा स्टाफ नर्स सुष्मिता शामिल रहीं। वहीं एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अरविंद यादव, डॉ. कीर्ति गुप्ता, डॉ. सौरभ (जेआर-3) और डॉ. सोनम (जेआर-2) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) ए. के. वर्मा ने इस उपलब्धि पर न्यूरोसर्जरी विभाग को बधाई देते हुए कहा कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराना कॉलेज की प्राथमिकता है। इससे प्रयागराज और पूर्वांचल के मरीजों को महानगरों की तरह अत्याधुनिक एवं न्यूनतम चीरे वाली रीढ़ की सर्जरी की सुविधा अब अपने ही शहर में मिल सकेगी।

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