Sambhal Shahi Jama Masjid-Harihar Mandir Dispute

सनी गुप्ता | संभल3 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में संभल के हरिहर मंदिर से जुड़े मामले की मंगलवार को सुनवाई है। 4 अगस्त को सुनवाई सुनिश्चित थी पर मामला सूची में 47वें नंबर पर था, लेकिन लंच के बाद भी इसकी बारी नहीं आई। इसके चलते अदालत में सुनवाई टल गई थी।

हरिहर मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत से शुक्रवार को सुनवाई की तारीख तय करने का अनुरोध किया था। हालांकि बाद में अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख निर्धारित कर दी थी।

अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया था कि अब यह मामला 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की सूची में पहले नंबर पर रखा गया है। ऐसे में उस दिन मामले पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।

मंदिर पक्ष का कहना है कि 11 अगस्त को मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत निर्णय भी सुना सकती है। हालांकि अंतिम फैसला अदालत की कार्यवाही और सुनवाई की प्रगति पर निर्भर करेगा।

19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष ने संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा कर सर्वे की मांग की थी।

19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष ने संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा कर सर्वे की मांग की थी।

28 जुलाई की सुनवाई में शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के वकील ने लगभग एक घंटे 10 मिनट तक अपना पक्ष रखा था। इससे पहले, 14 जुलाई को हुई सुनवाई में इंतजामिया कमेटी के अनुरोध पर 28 जुलाई की तारीख तय की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट संख्या-05 में न्यायमूर्ति पामीदीघानतम श्री नारासिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी और जामा मस्जिद ट्रस्ट की याचिकाओं को आपसी समझौते के तहत एक ही याचिका पर सुनने का सुझाव दिया था। हालांकि, दोनों पक्ष अपनी अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के लिए अड़े रहे।

इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली ने बताया कि पिछली सुनवाई में उन्होंने कुछ जरूरी कागजात दाखिल करने के लिए समय मांगा था। ट्रस्ट अध्यक्ष मोहम्मद काशिफ खान ने पुष्टि की कि उनके अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में आपसी समझौते के सुझाव को अस्वीकार कर दिया था।

24 नवंबर, 2024 को संभल में मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा हुई थी।

24 नवंबर, 2024 को संभल में मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा हुई थी।

हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के फैसले को सही ठहराया था

सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने 18 मई 2025 को सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट, चंदौसी द्वारा शाही जामा मस्जिद और श्रीहरिहर मंदिर विवाद में दिए गए सर्वेक्षण को सही ठहराया था।

हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज करते हुए सिविल अदालत के सर्वेक्षण के निर्णय को बरकरार रखा था। इसके बाद मस्जिद कमेटी ने 1 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जो 5 अगस्त को पंजीकृत हुई।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पहली सुनवाई 22 अगस्त 2025 को हुई थी, जिसमें हिंदू पक्ष को नोटिस जारी किया गया था। अगली सुनवाई 16 मार्च 2026, 20 अप्रैल 2026, 05 मई 2026 एवं 14 जुलाई 2026 को हुई है।

19 नवंबर, 2024 को सर्वे के लिए टीम पहली बार मस्जिद पहुंची थी।

19 नवंबर, 2024 को सर्वे के लिए टीम पहली बार मस्जिद पहुंची थी।

अब समझिए पूरा मामला

19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ और दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए।

सर्वे को बाधित करते हुए हिंसा भड़क गई। पुलिस पर पथराव-फायरिंग की गई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित ASP अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए।

23 नवंबर को एसपी केके विश्नोई के साथ प्रशासनिक अफसरों ने सर्वे से पहले विवादित स्थल का निरीक्षण किया था।

23 नवंबर को एसपी केके विश्नोई के साथ प्रशासनिक अफसरों ने सर्वे से पहले विवादित स्थल का निरीक्षण किया था।

सपा सांसद समेत 2750 से ज्यादा लोगों पर FIR

संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित कई लोगों को नामजद करते 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया, हालांकि चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर विधायक पुत्र का नाम निकाल दिया गया।

जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 158 अभियुक्तों को जेल भेजा गया, जिसमें 3 महिलाएं और संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस एवं गुलाम भी शामिल हैं। मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर 2025 में रासुका लगी, इसके बाद अब वारिस और गुलाम पर भी रासुका की कार्रवाई की गई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को बीती 1 अगस्त 2025 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था। 24 मार्च को उन्हें जेल भेजा गया था और 131 दिन के बाद जेल से बाहर आए थे।

इसके अलावा, सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क, सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल सहित 40 लोगों के खिलाफ नामजद और 2750 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। 18 जून को SIT ने 1128 पन्नों में सांसद बर्क सहित 23 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, सपा विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं है।

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