RBI ऑफीसर बनकर 95 लाख की ठगी:लैप्स पॉलिसियों की रकम दिलाने के नाम पर पांच साल तक ठगा, गूगल सर्च से मिला नंबर


भारतीय रिजर्व बैंक का अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने एक व्यक्ति से 95 लाख रुपये की ठगी की। आरोपियों ने बीमा कंपनियों की लैप्स पॉलिसियों की रकम वापस करने के नाम पर ठगी की। आरोपी अलग-अलग मदों के नाम पर पीड़ित से पांच साल तक रुपये ट्रांसफर करवाते रहे। आरोपियों की ओर से लगातार रुपये की मांग करने पर पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। जिसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत डीसीपी सेंट्रल से की। 2008 से 2012 के बीच कई पॉलिसी कराई थी काकादेव नवीन नगर निवासी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2008 से 2012 के बीच कई बीमा कंपनियों से पॉलिसियां कराई थी। समय से किस्त जमा नहीं होने के कारण पॉलिसियां लैप्स हो गई। पॉलिसी की धनराशि वापस पाने के प्रयास में उन्होंने बीमा कंपनियों से संपर्क किया। जहां जानकारी हुई कि लैप्स बीमा पॉलिसियों की रकम आरबीआई में भेज दी जाती है। यह रकम प्राप्त करने के लिए आपको आरबीआई से संपर्क करना होगा। तब उन्होंने गूगल सर्च इंजन पर आरबीआई का टोल–फ्री नंबर सर्च किया। जिस नंबर पर कॉल करने पर पंकज सिंह नाम के व्यक्ति ने बातचीत करते हुए खुद को आरबीआई अधिकारी बताया। साथ ही रकम वापसी के लिए लैप्स पॉलिसियों की डिटेल, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज ई-मेल के माध्यम से मांगे। 2017 में खाते से निकाले थे 11.14 लाख रुपये जिसके बाद वर्ष 2017 में उनके बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से 11.14 लाख रुपये निकल गए। जिसकी जानकारी उन्होंने काफी समय के बाद हुई। इस बीच दीपक सिंह नाम के व्यक्ति ने खुद को आरबीआई से अधिकारी बताकर कॉल की। साथ ही लैप्स पॉलिसी व साइबर ठगी कर निकाली गई धनराशि आरबीआई के नियंत्रण में होने की बात बोली। जिसके बाद रकम वापसी के नाम पर 2021 से 2026 तक अलग-अलग मदों के नाम पर रकम मांग कर करीब 95 लाख रुपये ट्रांसफर करवाये। बावजूद इसके आरोपियों द्वारा लगातार रकम की मांग की जा रही है। साथ ही रुपये नहीं जमा करने पर पूरी रकम डूबने की धमकी दी जाने लगी। तब उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। नजीराबाद थाना प्रभारी पवन कुमार सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। साइबर सेल की मदद से आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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