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पुरी4 मिनट पहले
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ओडिशा के पुरी और गुजरात के अहमदाबाद में आज भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाएगी। दोनों शहरों में करीब 15-15 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। पुरी में सुबह 3 बजे से अनुष्ठान शुरू होंगे। सुबह 6 बजे मंगला आरती होगी।
इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाकर तीन भव्य रथों पर विराजमान कराया जाएगा। पुरी के राजा गजपति महाराजा सोने की झाड़ू से रथों को बुहारेंगे। शाम 4 बजे श्रद्धालु तीनों रथों को खींचते हुए जगन्नाथ मंदिर से 3 किमी दूर गुंडिचा मंदिर के लिए रवाना करेंगे।
अहमदाबाद में रथयात्रा की शुरुआत सुबह 4 बजे मंगला आरती से होगी, जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने माता-पिता से बच्चों की जेब में नाम, पता और मोबाइल नंबर की पर्ची रखने की अपील की है। रथयात्रा में 17 हाथी शामिल होंगे, जिनमें पिछले साल साल आतंक मचाने वाला हाथी ‘बाबू’ भी रहेगा।
पहले जानिए 2 सबसे बड़ी रथ यात्राओं के बारे में

सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करेंगे पुरी गजपति
- रथयात्रा शुरू होने से पहले पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव तीनों रथों की पूजा करेंगे। वे भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाते हैं। इसके बाद वे सोने की झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करेंगे। फिर चंदन और सुगंधित जल का छिड़काव करेंगे। इस रस्म को ‘छेरा पहरा’ कहा जाता है।
- रथयात्रा से पहले यह रस्म हर साल होती है। यह परंपरा बताती है कि भगवान के सामने राजा और आम इंसान सभी समान हैं। इसलिए गजपति महाराजा भी खुद को भगवान का सेवक मानकर यह सेवा करते हैं।
सबसे पहले बलभद्र, सबसे आखिर में जगन्नाथ का रथ
- रथयात्रा में तीनों रथ एक क्रम से निकलते हैं। सबसे पहले भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई बलभद्र का तालध्वज रथ चलता है। इसके बाद बहन सुभद्रा का दर्पदलन रथ निकलता है। सबसे आखिर में भगवान जगन्नाथ अपने नंदीघोष रथ पर सवार होकर यात्रा शुरू करते हैं।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, बड़े भाई होने के कारण बलभद्र सबसे पहले मार्ग दिखाते हैं, उनके पीछे बहन सुभद्रा चलती हैं और अंत में भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं। यही क्रम हर साल रथयात्रा और बहुदा यात्रा, दोनों में निभाया जाता है।
रथयात्रा से जुड़ी हर अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
लाइव अपडेट्स
07:30 PM15 जुलाई 2026
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मंगला आरती से होगी रथयात्रा की शुरुआत, देखिए पूरे दिन का कार्यक्रम

07:29 PM15 जुलाई 2026
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पुरी में पहली बार AI कैमरों से होगी रथयात्रा की निगरानी

07:28 PM15 जुलाई 2026
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पुरी में 3 किमी लंबे रास्ते से गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं भगवान

07:26 PM15 जुलाई 2026
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रथयात्रा में 12 हजार जवान तैनात; 473 CCTV कैमरों से निगरानी
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने ओडिशा पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) के करीब 12 हजार जवानों को तैनात किया है। इनके नेतृत्व के लिए 19 सीनियर IPS अधिकारी जिम्मेदारी संभालेंगे।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 1,700 बायो टॉयलेट, 8 अस्थायी अस्पताल, 473 CCTV कैमरे, 65 LED डिस्प्ले स्क्रीन और 16 स्थायी टेलीकॉम टावर लगाए गए हैं। गर्मी से राहत और आग से बचाव के लिए 360 डिग्री हाई-प्रेशर वाटर टावर लगाए गए हैं। ये वाटर टावर चारों दिशाओं में पानी की फुहार छोड़ सकते हैं।
आज भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंच रहे हैं। भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने 300 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। वहीं, पुरी रेलवे स्टेशन पर करीब 30 हजार यात्रियों के ठहरने और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए गए हैं।
07:25 PM15 जुलाई 2026
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नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन; तीनों रथ की अलग पहचान
रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए हर साल तीन अलग-अलग रथ बनाए जाते हैं। तीनों रथों का नाम, रंग, ऊंचाई, पहियों की संख्या, लकड़ी के टुकड़ों की संख्या, ध्वज, रस्सी और सारथी अलग-अलग होते हैं।
भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ में 832 लकड़ी के टुकड़े लगते हैं और इसका रंग लाल-पीला होता है। भगवान बलभद्र के तालध्वज रथ में 763 लकड़ी के टुकड़े और लाल-हरा रंग होता है। वहीं, देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ में 593 लकड़ी के टुकड़े लगते हैं और इसका रंग लाल-काला होता है।



07:24 PM15 जुलाई 2026
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रथयात्रा में रस्सी खींचना भगवान की सेवा का प्रतीक

07:22 PM15 जुलाई 2026
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गुंडिचा मंदिर को भगवान की मौसी घर माना जाता है

07:17 PM15 जुलाई 2026
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छह महीने पहले से बुकिंग, लॉज का किराया ₹50 हजार तक
रथयात्रा को लेकर पुरी के सभी होटल और लॉज फुल हो चुके हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक, इस साल फरवरी से बुकिंग शुरू हो गई थी। मंदिर के आसपास और रथ यात्रा मार्ग के होटल-लॉज की डिमांड ज्यादा है।
यही नहीं, जिन होटल या लॉज की बालकनी या खिड़की रथ यात्रा मार्ग की तरफ खुलती है, उनके लिए ज्यादा मारामारी है, ताकि श्रद्धालु अच्छी तरह से भगवान के दर्शन कर सकें। पिछले साल के मुकाबले होटल-लॉज के रेट 10 गुना तक बढ़े हैं। जिन लॉज का किराया 1500 से 2000 रुपए होता है, उनका किराया 3 दिन के लिए 50 हजार रुपए तक है। पूरे शहर में 1200 होटल हैं।
07:16 PM15 जुलाई 2026
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18 दिन पहले से रथयात्रा के अनुष्ठान, गुंडिचा मंदिर में 7 दिन रुकते हैं जगन्नाथ

07:15 PM15 जुलाई 2026
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हर साल नई लकड़ी से तैयार किए जाते हैं रथ

07:14 PM15 जुलाई 2026
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रथयात्रा के बाद रथ के हिस्से बेचे जाते हैं, लाखों रुपए कीमत

07:12 PM15 जुलाई 2026
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जगन्नाथ मंदिर का निर्माण राजा अनंतवर्मन ने शुरू कराया, अनंगभीम ने पूरा किया

07:08 PM15 जुलाई 2026
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रथयात्रा के बीच 19 जुलाई को खुलेगा रत्न भंडार
रथयात्रा के बीच जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 19 जुलाई को एक दिन के लिए खोला जाएगा। उस समय भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथयात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर में होंगे।
इस दौरान स्नान यात्रा के समय भगवान की मूर्तियों से उतारे गए सोने और अन्य कीमती आभूषणों की गिनती और डिजिटल डॉक्युमेंटेशन किया जाएगा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के अनुसार, यह विशेष इन्वेंट्री आधुनिक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
07:08 PM15 जुलाई 2026
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पुरी में रथयात्रा निकालने की परंपरा करीब 1100 साल पुरानी

07:07 PM15 जुलाई 2026
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भगवान जगन्नाथ की पहली मूर्ती गुंडिचा मंदिर में ही बनाई गई थीं

