डिंडोरी में कीड़ों को मारकर सिर का मालाया बनाया जा रहा है। एक सिर को दो रुपए में खरीद रहा वन विभाग।
मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में वन विभाग जंगलों को बचाने कीड़ों का सिर कटवा रहा। साल बोरर कीड़े का सिर 2 रुपए में खरीद रहा है। मकसद कीड़ों को खत्म कर साल (सरई) के जंगलों को बचाना है। अब तक करीब 10 लाख कीड़ों के सिर काटे जा चुके हैं। बदले में ग्रामीणो
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दरअसल, साल बोरर कीट ने जिले के जंगलों को प्रभावित कर दिया है। हालात इतने गंभीर हैं कि भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद 1 लाख 46 हजार 784 प्रभावित पेड़ों की कटाई की जाएगी। फिलहाल वन विभाग कीड़ों की संख्या कम करने के लिए ग्रामीणों की मदद से विशेष अभियान चला रहा है।
ये तस्वीरें देखिए

पेड़ों की छाल में कीड़ों को फंसाते हैं, फिर पकड़ते हैं ग्रामीण।

कीड़ों को पकड़कर डिब्बे में भरते हैं। सिर काटकर माला बनाते हैं।

सिर काटकर माला बनाती हुई नजर आ रही महिला।

इमारती पेड़ों को कीड़े खोखले कर रहे हैं।
कीड़ों को पकड़ने के लिए सुबह जंगल पहुंचते हैं ग्रामीण
एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि बारिश के मौसम में हर दो हेक्टेयर क्षेत्र में साल का एक पेड़ काटकर उसकी छाल को पीटने के बाद छोड़ दिया जाता है। साल के रस की खुशबू से आकर्षित होकर कीट वहां रस पीने पहुंचते हैं। इसके बाद सुबह 5 से 7 बजे के बीच ग्रामीण जंगल पहुंचकर उन्हें पकड़ लेते हैं।
पकड़े गए कीटों के सिरों की माला बनाकर उन्हें कीट संग्रहण केंद्रों पर जमा कराया जाता है। इसके लिए खारीडीह, चौरादादर, कबीर, जगतपुर और करंजिया में 5 संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं। 30 जुलाई के बाद एकत्र किए गए इन कीटों को नष्ट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
30 हजार हेक्टेयर जंगल में फैला साल बोरर का प्रकोप
वन विभाग के एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया, दक्षिण समनापुर और बजाग वन परिक्षेत्र के करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लगे सरई (साल) के पेड़ साल बोरर कीट से प्रभावित हैं। कीटों को पकड़ने का अभियान 20 जून से ग्रामीणों की मदद से लगातार चलाया जा रहा है।
वन विभाग ने साल बोरर कीट का एक सिर लाने पर 2 रुपए देने की व्यवस्था की है। अब तक ग्रामीण करीब 10 लाख कीड़ों के सिरों की माला बनाकर वन विभाग कार्यालय में जमा कर चुके हैं। प्रत्येक व्यक्ति के जमा किए गए सिरों की अलग-अलग एंट्री की जा रही है।

खराब हो रहे पेड़ों की जांच करते नजर आ रही वन विभाग की टीम।
ऐसे पकड़े जाते हैं साल बोरर कीड़े
एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि सरई के पेड़ों की छाल काटकर उसे पीटा जाता है। इससे निकलने वाली सुगंध करीब 3 किलोमीटर दूर तक फैलती है। इसकी गंध से आकर्षित होकर साल बोरर कीट रस पीने पहुंचते हैं। कुछ समय के लिए सुस्त हो जाते हैं।
वन विभाग पेड़ों की छाल का रेजिन कूटकर उसका पाउडर भी घरों के आसपास रखवाता है। इसकी गंध से आकर्षित होकर कीट वहां पहुंचते हैं, जहां ग्रामीण उन्हें पकड़ लेते हैं। सूरज निकलने से पहले कीटों को पकड़ लिया जाता है, क्योंकि बाद में वे उड़ने लगते हैं।
पकड़े गए कीटों के सिर काटकर उनकी माला बनाई जाती है। वन विभाग के कर्मचारियों के पास जमा कराई जाती है। इसके बाद प्रति सिर के हिसाब से भुगतान किया जाता है।
आखिर पेड़ों के लिए इतना खतरनाक क्यों है यह कीड़ा
साल बोरर केवल साल (सरई) के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है। संख्या बढ़ने पर यह पेड़ के तने में घुसकर उसे धीरे-धीरे खाता है। इसके कारण तने के नीचे बुरादे जैसा पाउडर जमा होने लगता है।
वन विभाग के मुताबिक, समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए तो यह एक पेड़ से दूसरे और फिर पूरे जंगल में तेजी से फैल जाता है। इससे बड़ी संख्या में साल के पेड़ सूख जाते हैं। हर-भरे पेड़ नष्ट हो जाते हैं। इन्हें बचाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।

डिंडौरी में साल जंगल को बचाने के लिए वन विभाग जुटा।
1.46 लाख पेड़ों की कटाई की तैयारी
वन विभाग की प्रोडक्शन DFO भारती ठाकरे ने बताया कि सामान्य वन मंडल ने 1 लाख 46 हजार 784 साल के पेड़ों को चिह्नित किया है। कीड़ों ने इन पेड़ों को खोखला कर दिया है। इनकी कटाई के लिए भारत सरकार की अनुमति का इंतजार है। अनुमति मिलने के बाद कटाई में करीब 3 महीने लगेंगे।
2 DFO की मौजूदगी में कीड़ों का खात्मा
वन विभाग के मुताबिक, अब तक इस अभियान के तहत करीब 20 लाख रुपए का भुगतान बन चुका है, जो ग्रामीणों में वितरित किया जाएगा। पकड़े गए कीटों को जुलाई के अंत में 2 डीएफओ अधिकारियों की मौजूदगी में खत्म किया जाएगा। अभियान भी जुलाई के अंत तक चलेगा।
कटाई के बाद मिलेगी हजारों क्यूबिक मीटर लकड़ी
अभियान के लिए सामान्य, उत्पादन, मंडला वेस्ट और मंडला ईस्ट के चार डीएफओ अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। पेड़ों की कटाई के बाद करीब 46,390 क्यूबिक मीटर इमारती लकड़ी और 43,390 क्यूबिक मीटर जलाऊ लकड़ी मिलने की उम्मीद है।
इनकी ई-नीलामी होगी। लकड़ी को गाड़ा सरई और करंजिया काष्ठ गार में सुरक्षित रखा जाएगा। डिंडौरी के जंगलों में साल बोरर का यह पहला बड़ा हमला नहीं है। इससे पहले 1997-98 में भी इसके प्रकोप के कारण बड़ी संख्या में साल के पेड़ों की कटाई करनी पड़ी थी।

क्या होता है साल बोरर?
साल बोरर (Sal Borer) ऐसा कीट है, जो केवल साल (सरई) के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसका वैज्ञानिक नाम हॉपलोसेरामबिक्स स्पिनिकोर्निस (Hoplocerambyx spinicornis) है। यह साल के तने में सुरंग बनाकर लार्वा और कीड़े के रूप में रहता है।
इसकी लंबाई करीब 2 इंच होती है और जीवन चक्र लगभग एक वर्ष का होता है। साल के जंगलों में इसका प्रकोप इतना गंभीर माना जाता है कि इसे कई बार महामारी की तरह भी देखा जाता है।
साल बोरर से बचाव के उपाय
वन विभाग के अनुसार, साल बोरर कीट के नियंत्रण के लिए संक्रमित पेड़ों की कटाई, कीड़ों को पकड़कर उनके सिर नष्ट करना और आवश्यकता पड़ने पर कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।