जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के वायरल वीडियो की भारत की 2 नामी लैब से जांच करवाई।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त ने पंथ विरोधी और गुरु विरोधी घोषित कर दिया है। जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने फसील से संबोधन में कहा कि वायरल वीडियो की फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आने के बाद सामूहिक तौर पर सिखों ने कार्रवाई के लिए कहा।
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इसके बाद इस पर 5 सिंह साहिबानों की मीटिंग में चर्चा की गई। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह को गुरुद्रोही और खालसा पंथ विरोधी करार दिया जाता है। पूरा खालसा पंथ और गुरु नामलेवा सीएम को मुंह न लगाएं। यह फैसला CM मान की कथित शराब वाली वायरल वीडियो की पुष्टि होने पर लिया गया।
इसके अलावा, अकाल तख्त ने AAP के सारे सिख विधायकों को भी तलब किया है। उन्होंने सरकार के बेअदबी कानून पर साइन किए थे, जिसे अकाल तख्त ने गलत ठहराया है।
वहीं, AAP प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने बयान जारी कर कहा है कि यदि मान भी लिया जाए कि वायरल वीडियो सही है, फिर भी इससे यह साबित नहीं होता कि वीडियो में दिख रहा शख्स कौन है।
इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान को श्री अकाल तख्त साहिब में तलब भी किया गया था। इसके बाद वायरल वीडियो की लैब जांच करवाने का फैसला लिया गया। अब इसकी रिपोर्ट पढ़कर सुनाई गई है।
CM मान को गुरू द्रोही-पंथ विरोधी करार देने का VIDEO
जत्थेदार ने फसील से ये बातें कहीं…
- सत्कार एक्ट पर सरकार ने हमारी राय नहीं ली: जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि पिछले दिनों पंजाब सरकार की ओर से सत्कार एक्ट लेकर आया गया, लेकिन इस संबंध में किसी भी पंथक संस्था से राय नहीं ली गई। 6 अप्रैल 2026 को पंथ की एक बैठक बुलाई गई थी, जिसके बाद पंथ की ओर से कहा गया था कि इस कानून को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद यह कानून पारित कर दिया गया।
- सरकार का कानून पंथ को कमजोर करेगा: जत्थेदार ने कहा कि यह कानून पंथ के खिलाफ है। उनका कहना था कि यह कानून पंथ को कमजोर करेगा और पंथिक मामलों में हस्तक्षेप का कारण बनेगा। उन्होंने कहा कि हमारे नियम और मर्यादाएं श्री अकाल तख्त साहिब से निर्धारित होती हैं।
- पंथ की बैठक में फैसला हुआ: जत्थेदार ने कहा- इसे लेकर स्पीकर को बुलाया था और 15 दिनों का समय दिया था, लेकिन उसके बाद उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। आज फिर से पंथ की एकत्रता (बैठक) हुई, जिसके बाद आगे की कार्रवाई और निर्णय लेने का फैसला किया गया।
- वीडियो को मान्यता प्राप्त लैबों में चेक कराया: विवादित वीडियो को लेकर कहा कि हमने पहले भी पत्र भेजकर आग्रह किया था कि इस वीडियो की जांच किसी स्वतंत्र और मान्यता प्राप्त लैब से करवा ली जाए, लेकिन उस समय जांच नहीं करवाई गई। इसके बाद हमने स्वयं पहल करते हुए भारत की दो बड़ी लैब्स से इस वीडियो की जांच करवाई।
- वीडियो से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई: जत्थेदार ने कहा- लैब की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह वीडियो न तो नकली है, न ही एडिट किया गया है। इसमें किसी प्रकार की AI तकनीक का उपयोग नहीं हुआ है और न ही इसके साथ कोई छेड़छाड़ की गई है।
- सीएम को कोई मुंह न लगाए: जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आने के बाद सामूहिक तौर पर सिखों ने कार्रवाई के लिए कहा। इसके बाद इस पर 5 सिंह साहिबानों की मीटिंग में चर्चा की गई। जिसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह को गुरुद्रोही और खालसा पंथ विरोधी करार दिया जाता है। पूरा खालसा पंथ और गुरू नामलेवा सीएम को मुंह न लगाए।

श्री अकाल तख्त में पंज सिंह साहिबान मीटिंग कर रहे हैं। इसमें CM भगवंत मान के मामले को लेकर चर्चा की जा रही है।
जत्थेदार ने आज रिपोर्ट पढ़कर सुनाई
मुख्यमंत्री भगवंत मान के शराब वाले कथित वायरल वीडियो पर फोरेंसिक जांच रिपोर्ट सोमवार को श्री अकाल तख्त साहिब में पढ़कर सुनाई गई। अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि वीडियो न तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाया गया है और न ही उसमें किसी तरह की एडिटिंग या छेड़छाड़ की गई है।
उन्होंने कहा कि इस वीडियो में सीएम गुरु साहिब की तस्वीर के सामने शराब का गिलास पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। हमने इस वीडियो की जांच भारत की 2 नामी लैब से करवाई है। उन लैबों की रिपोर्ट के अनुसार यह वीडियो 100 प्रतिशत सही और वास्तविक है।
वीडियो से संबंधित पूरा मामला 3 पॉइंट्स में जानिए
- NRI ने जारी किया था वीडियो: यह मामला पहली बार अक्टूबर 2025 में सामने आया। एक NRI जगमान समरा ने इंटरनेट पर वीडियो जारी किया। वायरल वीडियो में कथित तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान को अपने हाथ में शराब का गिलास पकड़े हुए दिखाया गया है।
- सिख गुरुओं के पवित्र चित्रों पर शराब के छींटे मारते दिखे: वीडियो में वह सिख गुरुओं और अन्य सिख धार्मिक हस्तियों के चित्रों (पोर्ट्रेट्स) के सामने खड़े हैं और उनके गिलास से शराब के छींटे उन पवित्र चित्रों पर गिराते हुए दिखाई दे रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल (SAD) और अन्य सिख धार्मिक संगठनों ने इसे सिख मर्यादा का उल्लंघन और गुरुओं का घोर अपमान यानी बेअदबी बताया था।
- AAP ने इसे AI जनरेटेड-डीपफेक बताया था: शुरुआत में AAP और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने इस वीडियो को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया था कि यह वीडियो पूरी तरह से AI-जनरेटेड और डीपफेक है, जिसे मुख्यमंत्री की छवि खराब करने के लिए सोशल मीडिया पर फैलाया गया है। इसके बाद इस वीडियो की जांच कराने की मांग SAD ने उठाई थी।

ये फोटो 15 जनवरी की है। अकाल तख्त जत्थेदार के सामने हाथ जोड़कर बैठे सीएम भगवंत मान। – फाइल फोटो
अकाल तख्त ने तलब किया, CM नंगे पैर पेश हुए
इसके बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने 5 जनवरी को एक आपत्तिजनक वीडियो और गोलक समेत दूसरे सिख मुद्दों पर की बयानबाजी को लेकर CM को तलब किया था। CM भगवंत मान 15 जनवरी को श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए थे। वह पहले नंगे पैर नजरें झुकाकर गोल्डन टेंपल पहुंचे थे। यहां माथा टेकने के बाद सबूतों से भरे काले रंग के 2 बैग लेकर सचिवालय चले गए थे।
CM ने कहा- चैलेंज नहीं किया, जत्थेदार ने कहा था- सिख मर्यादा का ज्ञान नहीं
पेशी के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि अकाल तख्त को चैलेंज करने की औकात मेरी नहीं है और यही सफाई मैंने अंदर दी है। वहीं, जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि पंजाब CM भगवंत मान ने स्वीकार किया है कि उन्हें सिख सिद्धांत-मर्यादा का ज्ञान नहीं है। इसलिए उन्हें इस तरह की बयानबाजी न करने को कहा गया है।

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सिखों के सर्वोच्च श्री अकाल तख्त ने पंजाब के CM भगवंत मान को तलब किया है। उन्हें 15 जनवरी को अकाल तख्त के सचिवालय में पेश होने को कहा गया है। CM मान ने भी कहा कि वह एक विनम्र सिख की तरह नंगे पैर अकाल तख्त पर पेश होंगे। पढ़ें पूरी खबर…
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