NEET Paper Leak Case | Rajesh Mall Statement on Daughter Riya Death

देहरादून स्थित घर के बाहर खड़े रिया के पिता।

NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देहरादून की उस छात्रा रिया कुमारी के पिता राजेश मल्ल थापा का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा, जिसने परीक्षा विवाद के बीच आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक मंत्री

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दैनिक भास्कर से बातचीत में पूर्व सैनिक राजेश मल्ल थापा ने कहा कि अब उनकी सबसे बड़ी मांग देश की परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की है, ताकि किसी भी छात्र को भविष्य की चिंता में ऐसा कदम न उठाना पड़े। साथ ही उन्होंने कहा कि रिया की मौत के बाद वह उसकी आवाज बनकर छात्र आंदोलन से जुड़े और आज भी चाहते हैं कि किसी अन्य परिवार को यह दर्द न सहना पड़े।

रिया के घर में रखी उनकी तस्वीर।

रिया के घर में रखी उनकी तस्वीर।

सवाल-जवाब में पढ़िए पूरी बातचीत…

सवाल: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद क्या आपको लगता है कि रिया को न्याय मिला?

जवाब: इस्तीफा देना जरूरी था। इसकी जिम्मेदारी उनकी थी। अगर NTA ठीक से काम करती तो पेपर लीक नहीं होता और रिजल्ट समय पर आता। शायद आज मेरी बेटी हमारे बीच होती। मैं इसे सिर्फ अपनी बेटी का नहीं, बल्कि उन सभी छात्रों का न्याय मानता हूं जिन्होंने इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई।

सवाल: रिया की याद आज भी आपको किस तरह परेशान करती है?

जवाब: हमारे लिए रिया आज भी जिंदा है। रातों को नींद नहीं आती। कई बार ऐसा लगता है कि वह आएगी और मुझे ‘पापा’ कहकर बुलाएगी। मैं आज भी उसे ढूंढता हूं। यह दर्द शायद जिंदगी भर खत्म नहीं होगा। अब मुझे डर लगने लगा है कि कोई मुझसे दूर न हो।

सवाल: अब सरकार और परीक्षा एजेंसियों से आपकी सबसे बड़ी उम्मीद क्या है?

जवाब: पूरा आंदोलन NEET पेपर लीक की वजह से खड़ा हुआ। लाखों छात्र सड़क पर उतरे, सोशल मीडिया के जरिए एकजुट हुए और आखिर सरकार को झुकना पड़ा। अब जरूरत है कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी बनाई जाए। ऐसा सिस्टम बने जिसमें मेहनत करने वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे और किसी को आत्महत्या जैसा कदम न उठाना पड़े।

सवाल: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके अभिभावकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

जवाब: बच्चों से कहूंगा कि धैर्य रखें और सच्चाई पर भरोसा बनाए रखें। अंत में जीत सत्य की ही होती है। अभिभावकों से मेरी अपील है कि वे बच्चों पर सिर्फ पढ़ाई का दबाव न डालें, बल्कि उनसे लगातार बात करें, उनका मन समझें और हर परिस्थिति में उनका साथ दें। मेरी बेटी वापस नहीं आएगी, लेकिन मैं चाहता हूं कि किसी और मां-बाप को यह दर्द कभी न झेलना पड़े।

रिया के कमरे में रखीं उनकी किताबें।

रिया के कमरे में रखीं उनकी किताबें।

सवाल: क्या आपको लगता है कि छात्र आंदोलन ने देश में बड़ा बदलाव लाने का रास्ता खोला है?

जवाब: बिल्कुल। यह युवाओं की ताकत थी जिसने सरकार को फैसला लेने पर मजबूर किया। अगर पढ़े-लिखे युवा आगे आएंगे और नेतृत्व करेंगे तो देश ज्यादा तेजी से आगे बढ़ेगा। लोकतंत्र में हर किसी को राजनीति में आने का अधिकार है।

सवाल: आंदोलन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई को आप कैसे देखते हैं?

जवाब: लाखों छात्र प्रदर्शन में शामिल थे। मेरे सामने पढ़े-लिखे बच्चे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। कुछ असामाजिक तत्व कहीं भी हो सकते हैं, लेकिन मैंने देखा कि कई जगह पुलिस का रवैया भी ठीक नहीं था। मैंने अधिकारियों से हाथ जोड़कर कहा था कि बच्चों पर हाथ मत उठाइए, उनकी भी गलती नहीं है।

सवाल: छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी से आपकी क्या बातचीत हुई?

जवाब: उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं ठीक हूं या नहीं। उन्होंने कहा कि वह मेरी पीड़ा समझते हैं और पूरा देश मेरे साथ खड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मेरी लड़ाई संसद में भी उठाएंगे। मैं उनके इस समर्थन के लिए आभारी हूं। मुझे उम्मीद है कि वे हम जैसे असहाय लोगों के साथ खड़े हैं।

ये रिया का कमरा है, उनके पिता के अनुसार जब वो कमरे तो देखते हैं तो बेटी की मौत एक बुरे सपने जैसा लगता है।

ये रिया का कमरा है, उनके पिता के अनुसार जब वो कमरे तो देखते हैं तो बेटी की मौत एक बुरे सपने जैसा लगता है।

सवाल: आपकी सबसे बड़ी मांग क्या है?

जवाब: मेरी मांग सिर्फ एक है, देश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। अगर शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तो देश अपने आप मजबूत होगा। उत्तराखंड से इसकी शुरुआत हो सकती है। परीक्षा प्रणाली इतनी पारदर्शी हो कि किसी मेहनती छात्र का भविष्य पेपर लीक या भ्रष्टाचार की वजह से बर्बाद न हो।

सवाल: आपको आंदोलन में शामिल होने की प्रेरणा कहां से मिली?

जवाब: जिस दिन पेपर लीक हुआ था, रिया ने मुझसे पूछा था कि “पापा, यह NTA किसने बनाया। हमारे लिए इतने सख्त नियम हैं, लेकिन पेपर कैसे लीक हो जाता है। वह इस व्यवस्था से बहुत नाराज थी। इसलिए मैं जंतर-मंतर गया, ताकि उसकी आवाज बन सकूं। मैं चाहता हूं कि ऐसी व्यवस्था बने जिसमें बच्चों पर अनावश्यक मानसिक बोझ न पड़े और उनकी मेहनत के साथ न्याय हो।

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