नितिन कुमार अवस्थी | मिर्जापुर6 मिनट पहले
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अगर हौसले बुलंद हों तो अभाव भी मंजिल की राह नहीं रोक सकते। मिर्जापुर के सर्वोदय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं ने इस बात को सही साबित किया है। यहां से 31 छात्राओं ने NEET की परीक्षा दी, जिसमें 18 को सफलता मिली है।
बड़े-बड़े कोचिंग सेंटर से पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राएं जिस परीक्षा को पास करने से रह जाते हैं उस परीक्षा को इन छात्राओं ने सीमित संसाधनों में पास किया है। दैनिक भास्कर की टीम मिर्जापुर के मड़िहान क्षेत्र में बने इस स्कूल में पहुंची। यहां पर टीचर्स और छात्राओं से बात की और सफलता की कहानी जानी।

स्कूल में छात्राओं को स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड, कंप्यूटर लैब की सुविधा मिलती है।
प्रदेश स्तर की परीक्षा से होता है चयन
सर्वोदय विद्यालय जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर बना है। करीब 4 एकड़ में यह स्कूल बनाया गया है। स्कूल में 8वीं से 12 वीं तक की पढ़ाई कराई जाती है। इस समय 540 बालिकाएं पढ़ाई कर रही हैं, जिनमें NEET और JEE की तैयारी करने वाली 80 बालिकाएं भी शामिल हैं। यहां आने वाली छात्राओं का चयन प्रदेश स्तर पर होने वाली परीक्षा के बाद होता है।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों की छात्राएं
NEET पास करने वाली 18 छात्राएं प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हैं। मिर्जापुर के पतरी गांव की रहने वाली प्रियंका भी इसमें शामिल हैं। प्रियंका की सफलता ने परिवार और गांव का नाम तो रोशन कर दिया, लेकिन अब डॉक्टर बनने का सपना आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। प्रियंका की ऑल इंडिया रैंक 907404 है।

NEET की परीक्षा पास करने वाली प्रियंका के घर की स्थिति बेहद खराब है।
परीक्षा पास की, लेकिन अब फीस बन रही रोड़ा
प्रियंका के पिता राजेंद्र दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण करते हैं। घर की स्थिति बेहद खराब है। कच्चे घर में बारिश का पानी भर जाता है। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी प्रियंका की सफलता से परिवार खुश तो है, लेकिन फीस को लेकर चिंतित भी है। परिवार के पास न खेती है और न ही कोई स्थायी आय का साधन। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई का खर्च जुटाना उनके लिए लगभग असंभव नजर आ रहा है।
घर पर एक मोबाइल फोन भी नहीं
घर की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिवार के पास अपना मोबाइल फोन तक नहीं है। पढ़ाई और परीक्षा से जुड़े सभी कामों के लिए प्रियंका ने पड़ोसी रणजीत सिंह का मोबाइल नंबर अपने एजुकेशनल रिकॉर्ड में दर्ज कराया था। इसी मोबाइल नंबर के सहारे उसने आवेदन, सूचना और परिणाम जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कीं।

पिता राजेंद्र का कहना है कि अगर सरकार मदद करती है तो बेटी की पढ़ाई होगी वरना मेरी क्षमता उसे पढ़ाने की नहीं है।
सीमित संसाधनों में भी नहीं मानी हार
सीमित संसाधनों के बावजूद प्रियंका ने हार नहीं मानी। प्रियंका बताती हैं कि पहले सर्वोदय स्कूल में मेरा चयन हुआ था। यहां पढ़ाई करते हुए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की परीक्षा पास की। कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई जारी रखी और मेहनत के दम पर NEET जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की। उसका सपना एक योग्य डॉक्टर बनकर गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है।
पिता बोले- फीस भरने की क्षमता नहीं है
वहीं पिता राजेंद्र बताते हैं कि बेटी ने सफलता पाई है अच्छी बात है। चारों बच्चों को 12वीं तक पढ़ा दिया उसके बाद पढ़ाई बंद करा दी। सरकार अगर मदद करेगी तो बेटी की पढ़ाई आगे बढ़ेगी नहीं तो अब उसकी पढ़ाई भी बंद करा दी जाएगी।

सर्वोदय विद्यालय में पढ़कर NEET क्वालीफाई करने वाली छात्राएं।
पहली साल 12, दूसरी बार 18 को सफलता
मिर्जापुर के सर्वोदय विद्यालय में NEET और JEE की तैयारी कराने की शुरुआत 2023 में हुई। 2025 की NEET परीक्षा में 12 और JEE में 1 बालिका सफल हुई। अब 2026 में NEET में सफल होने वाली बालिकाओं की संख्या बढ़कर 18 हो गई, जबकि JEE में 13 बालिकाओं ने सफलता प्राप्त की।
सफलता पाने वाली छात्राओं में पूजा रंजन, श्वेता पाल, खुशबू, लक्ष्मी रावत, मालती, अंकिता, अनीता, मनीषा, प्रेमलता, अंकिता कुमारी, कोमल, सपना, अंशिका, प्रियंका, फूल कुमारी, अनुराधा, खुशी और आंचल शामिल हैं।

सर्वोदय विद्यालय में पढ़कर NEET क्वालीफाई करने वाली छात्राएं।
सुबह 6 बजे से शुरू हो जाती है दिनचर्या प्रदेश के 103 सर्वोदय विद्यालयों से चयनित 80 बालिकाओं को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में तैयारी कराई जा रही है। इन छात्राओं की दिनचर्या सुबह 6 बजे शुरू होती है और 7.15 से क्लास शुरू हो जाती हैं। 11-12वीं की नियमित पढ़ाई के साथ ही चयनित बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग दी जाती है। आशुतोष कुमार द्विवेदी फिजिक्स, सुधीर यादव बायलोजी, डी. गुप्ता केमेस्ट्री, प्रियांशु कुमार मैथ और त्रिलोकी नाथ गुप्ता केमेस्ट्री पढ़ाते हैं।

सर्वोदय विद्यालय में पढ़कर NEET क्वालीफाई करने वाली छात्राएं।
बच्चों की फीस में मदद करता है फाउंडेशन एक्स नवोदयन फाउंडेशन यह सुनिश्चित करता है कि फीस की कमी किसी भी छात्रा के लक्ष्य प्राप्ति में बाधा न बने। टाटा एआईजी गरीब बालिकाओं को छात्रवृत्ति प्रदान करता है। यदि इसके बाद भी धनराशि कम पड़ती है, तो सीएसआर प्रोजेक्ट टीम के सदस्य इं. नागेंद्र सिंह, डॉ. अरुण तिवारी, इं. बृजेश सिंह और इं. दीपक जाजू रुपये इकट्ठा करके छात्राओं की फीस की पूर्ति करते हैं। स्कूल के प्रधानाचार्य वृद्धि नारायण ने बताया कि यहां समाज कल्याण विभाग के माध्यम से गरीब परिवारों की बालिकाओं को प्रवेश दिया जाता है।

पूरे यूपी से 40 बच्चियों का होता है चयन
टीचर अश्विनी ने बताया कि एक्स नवोदयन फाउंडेशन, टाटा एआईजी और समाज कल्याण विभाग मिलकर इसका संचालन करते हैं। यहां पूरे यूपी से 40 बच्चियों को लाया जाता है, जिन्हें IIT-NEET की निःशुल्क कोचिंग दी जाती है, साथ ही काउंसलिंग से लेकर एडमिशन तक की पूरी जिम्मेदारी उठाई जाती है।
6 टीचर मिलकर चलाते हैं 4 क्लास
यहां करीब 6 अध्यापक हैं और हर दिन 4 क्लास लगती हैं। बच्चियों की पढ़ाई और फीस का पूरा खर्च टाटा एआईजी और एक्स नवोदयन फाउंडेशन वहन करते हैं ताकि उनकी शिक्षा में कोई रुकावट न आए। इसके अलावा, आईआईटी में चयनित बच्चियों को आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए समाज कल्याण विभाग से स्कॉलरशिप दिलवाई जाती है। इस समय हॉस्टल में कक्षा 11 की 40 और कक्षा 12 की 40 बच्चियों को मिलाकर कुल 80 छात्राएं रह रही हैं।

टीचर बोले- पहले बच्चों का बेसिक सही कराया
बायोलॉजी फैकल्टी के टीचर सुधीर यादव ने बताया कि सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस की तरफ से यहां टीचिंग करता हूं। मैंने जून 2023 को जॉइन किया था। हमने सबसे पहले बच्चों के बेसिक को ठीक किया और अब जाकर उसमें कह सकते हैं कि मेहनत का फल मिल रहा है। अगर मेहनत किसी भी दिशा में ईमानदारी से करें तो फल जरूर मिलेगा।

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