Mamata Banerjee TMC Crisis LIVE Update; Yusuf Pathan Saayoni Ghosh Shatrughan Sinha

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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में टूट जारी है। गुरुवार को एक और राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने इस्तीफा दे दिया है।

पिछले चार दिनों में तीन राज्यसभा सांसद ममता को छोड़कर जा चुके हैं। एक दिन पहले सुष्मिता देव ने भी रिजाइन किया था। वहीं 8 जून को सुखेंदु रे भी पार्टी और सांसद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं।

अब तक TMC के लोकसभा में 28 में से 20 और राज्यसभा में 13 में से 3 सांसद यानी कुल 23 सांसद टूट चुके हैं। वहीं 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 TMC विधायक अलग गुट बना चुके हैं।

इन विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने के लिए स्पीकर को पत्र दिया था। ऋतब्रत ने बुधवार को कहा कि हमारे पास 64 विधायक हैं। बाकी के 6 विधायक भी स्पीकर को चिट्ठी सौंपेंगे। उधर बुधवार को बगावत करने वाले लोकसभा सांसदों की लिस्ट सामने आई।

एक दिन पहले सामने आए TMC के 19 बागी सांसदों के नाम …

लोकसभा सीट नाम लोकसभा सीट नाम
बारासात काकोली घोष घाटाल दीपक अधिकारी (देव)
कूचबिहार जगदीश चंद्र बसुनिया झाड़ग्राम कालीपद सोरेन
जांगीपुर खलीलुर रहमान मेदिनीपुर जून मालिया
बहरामपुर यूसुफ पठान बांकुड़ा अरूप चक्रवर्ती
मुर्शिदाबाद अबू ताहेर खान बर्धमान पूर्व डॉ. शर्मिला सरकार
बैरकपुर पार्थ भौमिक आसनसोल शत्रुघ्न सिन्हा
मथुरापुर बापी हलदार बोलपुर असित कुमार माल
जादवपुर सायनी घोष बीरभूम शताब्दी रॉय
कोलकाता दक्षिण माला रॉय हुगली रचना बनर्जी
आरामबाग मिताली बाग

10 जून को राहुल गांधी से मिले थे अभिषेक बनर्जी

एक दिन पहले 10 जून को ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। वहीं 9 जून को ममता सोनिया गांधी से मिलीं थीं।

टीएमसी छोड़ने वाली सुष्मिता देव ने असम सीएम से मुलाकात की। वहीं अभिषेक बनर्जी दिल्ली में राहुल से मिलने पहुंचे।

टीएमसी छोड़ने वाली सुष्मिता देव ने असम सीएम से मुलाकात की। वहीं अभिषेक बनर्जी दिल्ली में राहुल से मिलने पहुंचे।

दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ममता कोलकाता लौटीं।

दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद ममता कोलकाता लौटीं।

TMC सांसदों और विधायकों की ममता से बगावत का घटनाक्रम…

8 जून: ममता बनर्जी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद टूटे

8 जून को टीएमसी के लोकसभा के 28 सांसदों में से 20 ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और TMC की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने कहा था कि सांसदों के साइन वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भेज दिया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई।

3 जून: 28 साल पुरानी TMC में बगावत, 58 विधायक अलग हुए

3 जून को टीएमसी में पहली बार बगावत की खबर सामने आई थी। 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस को समर्थन पत्र दिया। इसमें मांग की गई कि ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित किया जाए। स्पीकर ने मंजूरी दे दी।

ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक और 18 सांसद बचे

टीएमसी के पास कुल 28 लोकसभा सांसद थे, जिसमें से 20 अलग हो गए हैं। अब लोकसभा में ममता के पास सिर्फ 8 सांसद बचे हैं। राज्यसभा की बात करें तो 13 में से 3 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं यानी सिर्फ 19 राज्यसभा सांसद बचे हैं।

विधानसभा की बात करें तो टीएमसी ने इस बार के चुनाव में 80 सीटें जीतीं थीं। जिसमें से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे हैं।

TMC बचाने के लिए ममता-अभिषेक की 3 कोशिशें…

  • टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों के बीच मजबूती बनाए रखने पर चर्चा हुई।
  • ममता बनर्जी ने मंगलवार को सोनिया गांधी से मुलाकात की। ममता सोनिया के आवास 10 जनपथ पहुंचीं। दोनों नेताओं की मुलाकात करीब एक घंटे तक चली।
  • 8 जून को करीब दो साल बाद हुई INDIA की बैठक में ममता और अभिषेक भी शामिल हुए थे। इस बैठक में 25 विपक्षी दल शामिल हुए थे।

TMC में फूट के बाद आगे क्या हो सकता है…9 संभावनाएं

कानूनी लड़ाई तेज होगी: ममता गुट और बागी गुट विधानसभा, चुनाव आयोग और अदालतों में अपनी-अपनी वैधता साबित करने की कोशिश करेंगे।

दल-बदल कानून की परीक्षा: बागी विधायकों के पास दो-तिहाई संख्या होने का दावा है, इसलिए उनकी मान्यता पर बड़ा कानूनी विवाद हो सकता है।

संगठन में और टूट-फूट संभव: कुछ विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता भी पक्ष चुन सकते हैं, जिससे दोनों गुटों की ताकत बदल सकती है।

ममता बनर्जी डैमेज कंट्रोल करेंगी: असंतुष्ट नेताओं को मनाने, संगठन में बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की कोशिश हो सकती है।

भाजपा और कांग्रेस नजर बनाए रखेंगी: विपक्षी दल TMC के संकट का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

स्थानीय निकाय और उपचुनावों पर असर: अगर फूट गहरी हुई तो आने वाले चुनावों में TMC के वोट बैंक और संगठन पर असर पड़ सकता है।

नई पार्टी या अलग गुट बन सकता है: यदि समझौता नहीं हुआ तो बागी खेमे के अलग राजनीतिक दल या स्थायी गुट के रूप में उभरने की संभावना है।

INDIA गठबंधन की राजनीति प्रभावित होगी: ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और INDIA ब्लॉक के भीतर उनकी ताकत पर असर पड़ सकता है।

सबसे बड़ा सवाल- TMC किसकी? आने वाले दिनों में असली लड़ाई सिर्फ विधायकों की संख्या की नहीं, बल्कि पार्टी के नाम, संगठन और राजनीतिक विरासत की होगी।

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