लखनऊ अग्निकांड में जान बचाने के लिए बिल्डिंग की दूसरी मंजिल से छलांग लगाने वाले जयंत गुप्ता चार दिनों से जिंदगी-मौत से जुझ रहे हैं। रीढ़ की हड्डी में गहरी चोट के कारण कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न पड़ गया है।
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जयंत का किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में इलाज चल रहा है। 7 डिपार्टमेंट के डॉक्टर मॉनिटरिंग और इलाज कर रहे हैं।
न्यूरो सर्जरी विभाग के एक्सपर्ट डॉ. अवधेश यादव ने दैनिक भास्कर से बातचीत में माना कि आगे का समय जयंत के लिए बेहद चुनौतियों से भरा होगा। उन्होंने कहा-
जयंत के दोनों पैरों में फ्रैक्चर है। दोनों पैर पैरालिसिस हो गए हैं। इसे कंपलीट कॉर्ड इंजरी कहते हैं। इसमें रिकवरी के चांस बहुत कम होते हैं। समय के साथ इसमें क्या रिकवरी होगी, ये देखना होगा। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई है कि जयंत जल्द अपने पैरों पर खड़ा हो सकेंगे।
3 तस्वीरों में देखिए जयंत ने कैसे अपनी जान बचाई थी…

सीन 1- इमारत में आग लग चुकी थी। जयंत सेकंड फ्लोर पर थे। जान बचाने के लिए वह ऊपर से नीचे कूद गए।

सीन 2- बिल्डिंग के नीचे खड़े लोग तुरंत दौड़े और उठाकर लेकर आए।

सीन 3- जयंत बिल्डिंग से नीचे सीधे ग्रिल पर गिरे। इससे गंभीर रूप से घायल होकर अचेत हो गए। उन्हें केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
पसलियों में फ्रैक्चर, फेफड़ों में भी चोट डॉक्टरों के मुताबिक, जयंत की पसलियों (रिब्स) में कई फ्रैक्चर हैं। दाहिनी पसली की 10वीं रिब्स और बाई पसली की 9वीं डैमेज हुई है। इसके चलते लंग्स में भी चोट आई है। यही कारण है कि ICD सपोर्ट (इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर) दिया गया है। फिलहाल उसे ICU में भी रखा गया है।
घटना के दौरान उसके दोनों हाथ झुलस गए थे। रीढ़ की हड्डी में D-10 स्तर पर गंभीर चोट लगने से पैरालिसिस (पैराप्लेजिया) की स्थिति बनी है। दोनों फेफड़ों के आसपास ब्लड जमा होने (बाइलेटरल हीमोथोरैक्स) और कई पसलियों में फ्रैक्चर पाया गया है। भर्ती के समय मरीज शॉक में था।

यह तस्वीर अक्टूबर 2025 की है। दीवाली के जश्न के दौरान हेड हॉपर्स की टीम के सदस्य ऑफिस में मौजूद थे। हरे घेरे में क्रीम रंग की शेरवानी पहनकर बैठे व्यक्ति जयंत हैं।
MRI रिपोर्ट में गंभीर चोट का खुलासा MRI रिपोर्ट में D-9 से D-11 स्तर के बीच स्पाइन (रीढ़) की लिगामेंट में गंभीर चोट मिली है। D-9 और D-10 स्तर पर स्पाइनल कॉर्ड के कटाव की आशंका, कॉर्ड में सूजन और आसपास के सेल में एडिमा और फ्लूइड कलेक्शन पाया गया है। दोनों फेफड़ों के आसपास हल्का फ्लूइड भी दिखाई दिया है।
डॉ. अवधेश यादव ने बताया कि जयंत गुप्ता के इलाज के लिए कई डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट डॉक्टरों का पैनल बनाया गया है। इनमें ICU और ट्रॉमा सर्जरी के एक्सपर्ट्स के अलावा न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन, रेस्पिरेटरी, प्लास्टिक सर्जरी और लंग्स एक्सपर्ट्स भी देख रहे हैं। और भी जिस विभाग के एक्सपर्ट्स की जरूरत होगी। उनको भी बुलाया जाएगा। सभी का प्रयास यही है कि बच्चा जल्दी से जल्दी ठीक हो जाए।

डॉ. अवधेश यादव ने बताया- जयंत के पैरों में जान लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
अब तक किस तरह का इलाज हुआ?
डॉक्टरों के मुताबिक, जयंत को ऑक्सीजन सपोर्ट, ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स सहित पूरी मेडिकल केयर दी जा रही है। उसके पेट की अल्ट्रासोनोग्राफी, सिर, धड़ और रीढ़ की सीटी स्कैन, स्पाइन की MRI कराई गई है। तमाम ब्लड जांच भी कराई गई हैं। प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम जले हुए घावों का उपचार कर रही है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जयंत को देखने गए थे।
ICU में है, पर वेंटिलेटर की जरूरत नहीं
डॉक्टरों के मुताबिक, फिलहाल जयंत पूरी तरह होश में है और डॉक्टरों के निर्देशों का पालन कर रहा है। बीपी सहित अन्य पैरामीटर्स नार्मल है। उसे सांस लेने में कोई परेशानी नहीं है और कमरे की सामान्य हवा में उसका ऑक्सीजन स्तर 96% दर्ज किया गया है।

डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि राउंड द क्लॉक मॉनिटरिंग की जा रही है। कई सुपर स्पेशलिस्ट डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट्स डॉक्टर इलाज में लगे हैं।
जयंत ने एक से बढ़कर एक नायाब करैक्टर किए डिजाइन
जून 2022 से जयंत हेड हॉपर्स में काम कर रहे थे। 4 साल के दौरान उन्होंने हार्ड सरफेस 3D मॉडलिंग और टेक्चरिंग में महारथ हासिल की थी। मौजूदा समय वो एनीमेशन में करैक्टर मॉडलिंग पर ज्यादा फोकस कर रहे थे। MAAC इंडिया से उन्होंने एनीमेशन की बारीकियों को सीखा था। 3D मॉडलिंग में जयंत ने टेक्सचर्ड कार्बाइन डिजाइन और वंडर वुमेन जैसे करैक्टर डिजाइन किए थे।

इस कार्बाइन को जयंत ने डिजाइन किया था।
अब जान लेते है जयंत के बारे में…
- लखनऊ के ऐशबाग निवासी 26 साल के जयंत गुप्ता के हेड हॉपर स्टूडियो में एनीमेशन आर्टिस्ट थे।
- वे 3D करैक्टर डिजाइनिंग का काम देखते थे।
- कई सालों से कंपनीं में काम कर रहे थे।
- उनकी सैलरी 50 हजार प्रतिमाह थी।
- आग लगने के दौरान जयंत गुप्ता सेकंड फ्लोर पर स्थित हेड हॉपर स्टूडियो में मौजूद थे।
- आग से घिरने पर जान बचाने के लिए उन्होंने सेकंड फ्लोर से छलांग लगा दी थी।
- इस दौरान लोहे के ग्रिल पर गिरकर गंभीररूप से घायल हो गए थे।
- अग्निकांड में जलने से वे बच गए हैं। बिल्डिंग में बचे सभी 15 लोगों की मौत हो गई थी।
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