रांची2 घंटे पहले
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झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC कार्यालय समेत आठ ठिकानों पर छापेमारी की।
जांच के दौरान परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के ठिकानों की भी तलाशी ली गई। कार्रवाई में JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इनमें डेटा एंट्री, प्रोग्रामिंग और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े लोग भी शामिल हैं। वहीं, TDPL के कार्यालय को सील कर दिया गया है।
इधर, बुधवार को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (मेन) परीक्षा-2025 स्थगित कर दिया है। यह परीक्षा 25, 26 और 27 जुलाई को रांची के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर होनी थी।
आयोग ने बताया कि परीक्षा संचालन में सामने आई गड़बड़ियों और राज्य सरकार से मिले निर्देश के बाद यह फैसला लिया गया है। साथ ही स्पष्ट किया कि परीक्षा की नई तिथि और अन्य जरूरी जानकारी जल्द जारी की जाएगी।

झारखंड लोक सेवा आयोग के कार्यालय सहित कुल आठ स्थानों पर CID और रांची पुलिस ने छापेमारी की।
डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू, सीएम कर रहे मॉनिटरिंग
उधर, देर शाम JPSC के अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया। बुधवार को राज्यपाल ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया। सिटी एसपी पारस राणा के नेतृत्व में मंगलवार को शुरू हुई छापेमारी देर रात तक चली।
टीम ने JPSC कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों और कंप्यूटरों की गहन जांच कर कई अहम दस्तावेज जब्त किए। वहीं, TDPL से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले गए, जिनसे कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
राज्य सरकार ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जब्त दस्तावेजों और कंप्यूटरों की जांच के लिए पुलिस और CID ने डिजिटल फॉरेंसिक टीम की मदद ली है।
अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी की कार्रवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।

छापेमारी की कार्रवाई आज भी जारी रहने की बात कही गई है, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
पहले श्वेता के घर की तलाशी, फिर हिरासत में लिया
CID की टीम ने सबसे पहले JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ की। इसके बाद उन्हें साथ लेकर वर्धमान कंपाउंड स्थित उनके आवास पर पहुंची, जहां तलाशी ली गई। वहां से टीम उन्हें दोबारा JPSC कार्यालय लेकर आई।
कार्यालय में दस्तावेजों की गहन जांच के बाद श्वेता गुप्ता को हिरासत में ले लिया गया। छापेमारी के दौरान पूरे JPSC कार्यालय की पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी और किसी को भी बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

छापेमारी के दौरान पूरे JPSC कार्यालय की पुलिस ने घेराबंदी कर रखी थी। किसी को बाहर जाने नहीं दिया गया।
इनके खिलाफ चल रही जांच
- परीक्षा एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड
- मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी (मार्केटिंग मैनेजर, टीडीपीएल)
- सत्यपाल सिंह (निदेशक, टीडीपीएल)
- रामबीर सिंह (निदेशक, टीडीपीएस)
- प्रोग्रामर एवं लोकसेवक (JPSC)
इन बिंदुओं पर जांच कर रही है CID
- डिजिटल टैंपरिंग और ओएमआर में फेरबदलः क्या परीक्षा के बाद सर्वर या ओएमआर शीट में बैकडेट में बदलाव किए गए ?
- मनी लॉन्ड्रिंग का कोणः अभ्यर्थियों से वसूली गई मोटी रकम किन-किन खातों में भेजी
- अधिकारियों की भूमिकाः ब्लैकलिस्टेड कंपनी को JPSC ने किस आधार पर परीक्षा संचालन की अनुमति दी।इसी बीच देर शाम JPSC के चेयरमैन एल ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
जानिए…कैसा बढ़ता चला गया विवाद
- 20 जून 2026: सहायक लोक अभियोजक (एपीपी) भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी हुआ। आयोग के दो सदस्यों ने परीक्षा एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके बाद चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे।
- 2 जुलाई 2026: 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हुआ। आयोग के तीनों सदस्यों ने रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए। इससे विवाद और गहरा गया।
- रिजल्ट के साथ कटऑफ अंक सार्वजनिक न करने पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई।
- अब परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी के यूपी में ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी सामने आने के बाद छापेमारी की यह कार्रवाई की गई।

पुलिस और CID की टीम ने जब्त दस्तावेजों और कंप्यूटरों की जांच के लिए डिजिटल फॉरेंसिक टीम को लगाया है।
बड़े सवाल… जो गड़बड़ियों का इशारा कर रहे
- पूरी परीक्षा प्रक्रिया एक निजी एजेंसी के हवाले करना निष्पक्षता के मानकों के अनुरूप है?जब आवेदन, प्रश्नपत्र, ओएमआर, स्कैनिंग, स्क्रीन मार्किंग और रिजल्ट प्रोसेसिंग तक एक ही एजेंसी के पास है, तो गड़बड़ी कैसे पकड़ी जाएगी?
- एजेंसी यूपी में ब्लैकलिस्टेड थी। क्या एजेंसी के चयन से पहले उसके पूर्व रिकॉर्ड, विवादों का सत्यापन किया गया था?
- पहले अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से सुरक्षा व गोपनीयता सुनिश्चित की जाती थी, तो अब व्यवस्था क्यों बदली गई।
