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- Jitendra Singh To Introduce Paper Leak Bill In Parliament | Stricter Laws
4 मिनट पहले
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्र आंदोलन खत्म होने के 2 दिन बाद आज संसद में पेपर लीक की रोकथाम से जुड़ा बिल पेश किया जाएगा। इस बिल का नाम ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोकसभा में बिल पेश करेंगे।
इस बिल के जरिए 2024 में बने कानून में बदलाव किए जाएंगे। आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान होगा। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बना सकेंगे। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी।
इस बिल का ऐलान पीएम मोदी ने 23 जुलाई की रात ढाई मिनट का वीडियो मैसेज जारी किया था। मोदी ने कहा था कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। लाखों छात्रों, उनके माता-पिता के लिए पीड़ादायक है। इसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट
1. जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।
2. कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।
3. NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।
4. ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना।

बिल लाने की जरूरत क्यों पड़ी, 4 वजहें; छात्र आंदोलन, फिर अनशन
- NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। यह परीक्षा करीब 20 लाख अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी है।
- पिछले कुछ वर्षों में NEET, भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया के कई मामले सामने आए, जिससे परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं।
- पेपर लीक के विरोध में देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए। कॉकरोच पार्टी का आंदोलन लगातार 36 दिन तक चला, जिसके बाद सरकार पर परीक्षा सुधार और सख्त कानून लाने का दबाव बढ़ा। शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।
- विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रही है और केवल नया कानून नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों व परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

पेपर लीक मामले पर विपक्ष का रिएक्शन, मांग- पीएम संसद में बयान दें
- कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 25 जुलाई को कहा था कि हम पेपर लीक से जुड़े बिल को लेकर बैठक करेंगे। बिल पर क्या स्टैंड होगा, यह आपस में चर्चा करके तय करेंगे।
- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा- यह किसी दल विशेष का नहीं बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य का मुद्दा है। पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार की सीधी जिम्मेदारी बनती है।
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- जब संसद चल रही होती है तो प्रधानमंत्री को संसद के पटल पर बयान देना होता है, देर रात एक वीडियो बनाकर, संसद के बाहर एकतरफा मन की बात नहीं करनी होती।
क्या है नीट पेपर लीक मामला, अब तक 13 अरेस्ट
3 मई 2026 को हुई NEET-UG 2026 परीक्षा का पेपर लीक हुआ। सरकार और NTA ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा कराई। इस दौरान देश भर में कई छात्रों ने सुसाइड किया।
पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन कर रही है। सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक अनशन किया और संसद में सांसद हंगामा कर रहे हैं।
फिलहाल मामले की जांच CBI कर रही है। इसमें महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली समेत कई राज्यों में पड़ताल हुई। अबतक 13 आरोपी पकड़े गए हैं। CBI जल्द ही इस चार्जशीट फाइल कर सकती है।

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