Gokuldas College Moradabad | Pre-PhD Course Work Inauguration 2026

शिवी शर्मा | मुरादाबाद6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मुरादाबाद के गोकुलदास हिंदू गर्ल्स महाविद्यालय में सोमवार को मनोविज्ञान और संगीत विषयों में प्री-पीएचडी कोर्स वर्क 2025-26 का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम प्राचार्या प्रो. चारु मेहरोत्रा के निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य शोधार्थियों को शोध के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्राचार्या प्रो. चारु मेहरोत्रा, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कोर्स वर्क की संयोजिका प्रो. किरण साहू, संगीत विषय की संयोजिका प्रो. प्रवीण सैनी और विषय विशेषज्ञ निखिल दास ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह कोर्स वर्क शाम पांच बजे तक चला।

प्राचार्या प्रो. चारु मेहरोत्रा ने बताया कि प्री-पीएचडी कोर्स वर्क शोधार्थियों को शोध पद्धति, साहित्य समीक्षा, शोध अभिकल्प, आंकड़ों के विश्लेषण और शोध नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्रदान करने में सहायक है। उन्होंने यह भी बताया कि शोधार्थियों को विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन देने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं।

मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. किरण साहू ने बदलती सामाजिक परिस्थितियों में तनाव, अकेलापन और व्यवहार संबंधी समस्याओं को समझने में मनोवैज्ञानिक शोध की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं, संगीत विषय की संयोजिका प्रो. प्रवीण सैनी ने संगीत के व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संगीत तनाव कम करने और मनोदशा बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

विषय विशेषज्ञ निखिल दास ने शोधार्थियों को साइबर क्राइम और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक किया। उन्होंने ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग, पहचान की चोरी और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग से सावधान रहने की अपील की।

दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जगबंधु प्रसाद ने ‘वैदिक काल एवं भारतीय संगीत का विकास’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय संगीत के विकास में सामवेद के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामपुर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भूपेंद्र कुमार ने ‘स्वरलिपि पद्धति’ विषय पर जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि स्वरलिपि के माध्यम से संगीत के स्वरों, लय, मात्रा और ताल को लिखित रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है।

इस अवसर पर प्रो. सीमा गुप्ता, प्रो. करुणा आनंद, प्रो. सुदेश, डॉ. प्रीति पांडे, डॉ. शेफाली अग्रवाल सहित मनोविज्ञान एवं संगीत विभाग की प्रवक्ताएं और बड़ी संख्या में शोधार्थी उपस्थित रहे। सभी ने प्री-पीएचडी कोर्स वर्क के शुभारंभ को शोध की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *