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- Cyber Crime FIR Report | Rajya Sabha Committee Reveals Low Conviction Rate
59 मिनट पहलेलेखक: अजय प्रकाश
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देश में साइबर क्राइम के मामलों में एफआईआर दर्ज होने की दर बेहद कम है। 2019 से 2024 के बीच छह साल में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 53.93 लाख शिकायतें आईं।
लेकिन, एफआईआर सिर्फ 1.30 लाख यानी 2.4% मामलों में ही दर्ज हुईं। राज्यसभा की गृह मामलों से संबंधित स्थायी समिति की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई। 31 सदस्यीय समिति के अध्यक्ष डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल हैं।
चिंता जताते हुए समिति ने अपराध के आंकड़ों और कानून-व्यवस्था के दावों पर सवाल उठाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर हेल्पलाइन 1930 और cybercrime.gov.in पर शिकायत के बाद भी फॉलो-अप में देरी होती है।

साइबर क्राइम पर संसदीय समिति की प्रमुख बातें…
अपराध छिप जाते हैं: क्राइम रेट कम दिखाने के लिए पुलिस FIR के बजाय सिर्फ गैर-संज्ञेय रिपोर्ट देती है, जिससे गंभीर अपराध छिप जाते हैं और लोग न्याय से वंचित होते हैं।
पूराना डेटा: राज्यों द्वारा NCRB को डेटा भेजने में 1.5 से 2 साल की देरी होती है, जिससे सुरक्षा नीतियां और बजट पुराने आंकड़ों पर बनते हैं।
जनता पर मार: अपराधों की संख्या दबने से असुरक्षित इलाकों में नए थाने, CCTV और जरूरी पुलिस बल नहीं मिल पाते।

प्रिंसिपल ऑफेंस रूल
समिति ने बताया कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ‘प्रिंसिपल ऑफेंस रूल’ पर काम करता है। यानी अगर किसी महिला का अपहरण करके उसके साथ लूटपाट की और फिर वीडियो ऑनलाइन लीक कर दिया गया।
एनसीआरबी इसे सिर्फ अपहरण में दर्ज करेगा। साइबर अपराध, महिला उत्पीड़न और लूट का सेकेंडरी डेटा छोड़ दिया जाएगा। इस तरह लाखों सेकेंडरी अपराध डेटा से पूरी तरह गायब हो जाते हैं।
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