अतुल कुमार सिंह | लखनऊ1 मिनट पहले
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लखनऊ में दो दिवसीय भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य महोत्सव ‘क्लासिकल वॉइस ऑफ अवध 2026’ का आयोजन किया गया। यह महोत्सव 24 और 25 जुलाई को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, भातखंडे एलुमनी एसोसिएशन और संगीत मिलन के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने विभिन्न शास्त्रीय विधाओं में प्रस्तुतियां दीं। इनमें खयाल, ध्रुपद, तबला, पखावज, सितार, कथक और भरतनाट्यम शामिल थे। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय परंपरा की विविधता से परिचित कराया।
संगीत-गायन विभाग की प्रो. सीमा ने बताया कि गायकों ने राग बिहाग, मधुवंती, बागेश्री और यमन सहित कई रागों का प्रदर्शन किया, जिसमें उनके वर्षों का अभ्यास और समर्पण स्पष्ट दिखा। नृत्य प्रस्तुतियों में कथक कलाकारों ने सधे हुए पद-संचालन और लय-ताल का प्रदर्शन किया, जबकि भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां लय और संतुलन से युक्त थीं। महोत्सव का एक विशेष आकर्षण जल तरंग की प्रस्तुति रही।

मुख्य उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है
प्रतिभागियों का मूल्यांकन कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ और चंडीगढ़ से आए शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल ने किया। उनके मार्गदर्शन और सुझावों से युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा को और निखारने का अवसर मिला।
इस मौके पर प्रो. सीमा ने कहा कि ‘क्लासिकल वॉइस ऑफ अवध 2026’ का मुख्य उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करना है। यह महोत्सव उभरते कलाकारों के लिए अपनी कला का प्रदर्शन करने और विशेषज्ञों से सीखने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
