झांसी में 2018 में जमीन कारोबारी संजय वर्मा पर दिनदहाड़े फायरिंग और गनर की हत्या के चर्चित मामले में कोर्ट ने शनिवार को 8 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। सभी पर 14 लाख रुपए का अर्थदण्ड भी लगाया है।
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इसमें से दो हत्यारे रिंकू गेड़ा उर्फ मनीष गुप्ता और उसका भाई बॉबी गेड़ा उर्फ संदीप गुप्ता को विवेचक CBCID के इंस्पेक्टर ने राहत दे दी थी। उन्होंने दोनों की नामजदगी गलत पाने की रिपोर्ट लगा दी थी। इसके खिलाफ पीड़ित संजय वर्मा कोर्ट चले गए थे।
कोर्ट ने माना था कि FIR में दोनों के नाम हैं। घायल संजय वर्मा और रवि वर्मा ने भी उनको गोली चलाते देखा। तमाम सबूत मिलने पर कोर्ट ने 24 अगस्त 2023 को दोनों आरोपियों को तलब कर केस में आरोपी बनाते हुए ट्रायल शुरू कर दिया था।
अब अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी (आवश्यक वस्तु अधिनियम) ने फैसला सुनाया तो उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिले। जबकि, सरदार सिंह गुर्जर समेत 8 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। सरदार सिंह गुर्जर और संजय वर्मा के बीच वर्चस्व की लड़ाई थी। इस दुश्मनी में अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है।

आरोपी रिंकू गेड़ा और बॉबी गेड़ा की तस्वीर।
एक दिन में हटा दिए थे नाम
चर्चित मामले की विवेचना सबसे पहले नवाबाद पुलिस, फिर जालौन पुलिस और इसके बाद सीबीसीआईडी ने की थी। इंस्पेक्टर ने जांच में रिंकू और बॉबी के नाम एक ही दिन में बाहर निकाल दिए गए। बताया था कि दोनों की नामजदगी को गलत पाई गई। जबकि, एक दिन पहले तक दोनों आरोपी थे।
केस डायरी के कोर्ट में पेश होने से पहले ही गेड़ा बंधुओं के वकील ने कोर्ट के सामने सीबीसीआईडी के काटे पर्चे पेश करते हुए राहत की मांग की। सीबीसीआईडी के पर्चे वकीलों के पास देख कोर्ट भी चौंक उठी। जज ने इसे गंभीरता से लेते हुए सीबीसीआईडी के विवेचक को फटकार लगाते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
2 तस्वीरें देखिए…

कोर्ट से उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिसकर्मी दोषियों को जेल ले गए।

जेल जाते समय दोषियों के घरवालों ने उन्हें लगे लगाया।
अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए…
साल 2018 में हुई थी वारदात
कोतवाली क्षेत्र के बड़ा बाजार स्थित मजदूरों वाली गली के रहने वाले जमीन कारोबारी संजय वर्मा 21 जुलाई, 2018 को कोर्ट में तारीख करके पजेरो कार से लौट रहे थे। तभी कचहरी चौराहे के पास बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं।
बाइक सवार बदमाशों ने करीब दो मिनट तक लगातार फायरिंग की थी। लगभग 20 राउंड गोलियां चलाई थीं। इसमें गोली लगने से उनके अंगरक्षक लक्ष्मी गेट बाहर के रहने वाले जय गोस्वामी की मौत हो गई थी। जय के शरीर में 11 गोलियां लगी थीं।
संजय वर्मा, उनाव गेट बाहर निवासी सुनील कुशवाहा और चालक रवि वर्मा को भी गोलियां लगीं थीं। संजय के बेटे संचित की शिकायत पर 9 लोगों के खिलाफ नवाबाद थाने में FIR दर्ज की गई थी। मामले की जांच सीबीसीआईडी ने की थी, जिसमें एक आरोपी शिवम गुर्जर का नाम हटा दिया था।

उम्रकैद की सजा के बाद दोषियों के घरवालों ने उनके पैर छुए।
सरदार सिंह समेत 8 आरोपी बरी
FIR में पहले 9 लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस जांच के दौरान षड्यंत्र रचने के आरोप में 7 और लोगों के नाम जोड़े गए, जिनमें सरदार सिंह गुर्जर, राव राजा, भरत सिंह, गौरव उर्फ मोंटी, सागर राणा, सनम डागर और नीतेश पटवारी शामिल थे। पुलिस ने इनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि घटना के समय ये सभी आरोपी पहले से जेल में बंद थे। एक-दूसरे के संपर्क में भी नहीं थे। ऐसे में साजिश रचने में उनकी भूमिका साबित नहीं होती। अभियोजन पक्ष भी इनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। इसके आधार पर कोर्ट ने सरदार सिंह समेत 8 आरोपियों को बरी कर दिया।
16 के खिलाफ मुकदमा चल रहा था
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल ने बताया कि 16 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में केस चल रहा था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 21 गवाह और कई अहम साक्ष्य पेश किए।
करीब 7 साल 10 महीने मामले में सुनवाई और जिरह के बाद कोर्ट ने शुक्रवार को बॉबी उर्फ संदीप गुप्ता, रिंकू गेड़ा उर्फ मनीष, राजेंद्र गुर्जर, भूपेंद्र सिंह उर्फ पुष्पेंद्र, प्रहलाद, ऊधम सिंह गुर्जर और कमलेश यादव को दोषी करार दिया था। जिन्हें शनिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
वहीं, षड्यंत्र रचने के आरोपी सरदार सिंह गुर्जर, राव राजा, भरत सिंह, सनम डागर, गौरव उर्फ मोंटी, सागर राणा, नीतेश पटवारी और रोहित उर्फ रोहताश के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया। इस मामले में रोहित जमानत पर है, जबकि अन्य सभी किसी न किसी जेल में बंद हैं।
जिन 8 दोषियों को सजा मिली, उनकी तस्वीरें…

सीडीआर, सीसीटीवी और बैलास्टिक रिपोर्ट बने अहम सबूत
इस मामले की सुनवाई करीब 7 साल 10 महीने चली, जिसमें 46 गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष ने दावा किया कि घटना के समय आरोपी झांसी में नहीं थे, लेकिन अभियोजन पक्ष ने सीडीआर, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए उनकी मौजूदगी साबित कर दी।
साथ ही बैलास्टिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि घटनास्थल से मिले कारतूस और खोखे उन्हीं हथियारों से फायर किए गए थे, जिन्हें पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर बरामद किया था। यह रिपोर्ट मामले में अहम सबूत साबित हुई।
3 आरोपियों के नाम हटाने पर विवेचक के खिलाफ दर्ज हुई थी FIR
मामले की जांच पहले नवाबाद पुलिस, फिर जालौन पुलिस और बाद में सीबीसीआईडी ने की थी। जांच के दौरान सीबीसीआईडी के विवेचक जेपी यादव ने सोनू, रिंकू और बॉबी के नाम प्राथमिकी से हटा दिए थे।
इस फैसले को चुनौती देते हुए संजय वर्मा कोर्ट पहुंचे। कोर्ट के निर्देश पर हुई जांच में पाया गया कि विवेचक ने गोपनीय दस्तावेज आरोपियों को उपलब्ध कराए थे। इसके बाद जेपी यादव के खिलाफ नवाबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।

दोनों की दुश्मनी सालों पुरानी, पहले भी गईं जानें
सरदार सिंह गुर्जर और जमीन कारोबारी संजय वर्मा के बीच पुरानी रंजिश है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अदावत की शुरुआत 2004 में हुई। जब सरदार सिंह गुर्जर के भतीजे और भरत सिंह के बेटे चंद्रशेखर गुर्जर की नवाबाद क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में संजय वर्मा और उसके साथियों पर आरोप लगे थे।
इसके दो साल बाद, 2006 में संजय वर्मा के भाई और सर्राफा कारोबारी अजय वर्मा की उनकी दुकान में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में सरदार सिंह गुर्जर, मानसिंह गुर्जर, राव राजा, भोला, भरत गुर्जर समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। यह घटना दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी को और गहरा कर गई।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 मई तक फैसला सुनाने की तय की थी समय सीमा
इस मामले की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट लगातार नजर रखे हुए था। स्थानीय अदालत से हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट मांगी जाती थी। वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक साल के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया था, लेकिन सुनवाई लंबी चलने के कारण समय सीमा तीन बार बढ़ानी पड़ी। अदालत को फैसला सुनाने के लिए 30 मई की अंतिम समय सीमा दी गई थी। इस मामले में एक आरोपी बाल अपचारी घोषित हो गया था। जिसका केस जुवनाइल कोर्ट में चल रहा है।