बदायूं4 घंटे पहले
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बदायूं में वजीरगंज इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह को एसएसपी अंकिता शर्मा ने शनिवार रात लाइन हाजिर कर दिया है। सुरेंद्र सिंह पर आरोप है कि मुठभेड़ के दौरान उन्होंने गोपनीयता का पालन नहीं किया और इसकी पूर्व सूचना उजागर कर दी। हालांकि अपराधी पकड़े गए लेकिन उनकी निष्ठा पर सवाल उठना लाजिमी था। हालांकि माना जा रहा है कि इस मामले में इंस्पेक्टर बिल्सी मनोज कुमार की भूमिका भी संदिग्ध रही है और विभागीय जांच में उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। क्योकि वो भी इस मुठभेड़ में शामिल रहे थे।
दरअसल, नौ मई की रात बिल्सी थाना क्षेत्र के बैरमई बुजुर्ग गांव निवासी लोकेश नाम के युवक से वजीरगंज के ब्योली गांव के पास बाइक व मोबाइल लूटा गया था। इस वारदात को 3 बदमाशों ने अंजाम दिया था। वहीं पिछले सप्ताह पुलिस ने मुठभेड़ के बाद तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया। इनमें दो को गोली लगी। सिपाही भी बदमाशों की फायरिंग में घायल हुआ था। पकड़े गए बदमाश फारुख उर्फ बादशाह निवासी गांव धनौली थाना बिल्सी, अमन चतुर्वेदी निवासी टीकमगढ़, मध्यप्रदेश घायल हुए थे। जबकि मुठभेड़ के बाद रुटीन कांबिंग में उनका एक साथी सुरजीत निवासी शाहजहांपुर गिरफ्तार हुआ था। इनके पास से लूटी गई बाइक भी बरामद हो गई थी।
हालांकि पुलिस का यह गुडवर्क बेडवर्क में उस वक्त बदल गया, जब मुठभेड़ की गोपनीयता में खलल पड़ा। अफसरों का मानना है कि गोपनीयता भंग होने से बदमाश अलर्ट हो सकते थे और पुलिस पर हैवी फायरिंग भी हो सकती थी। इसमें पुलिस टीम की जान जोखिम में पड़ सकती थी। ऐसे में फौरी तौर पर एसएचओ वजीरगंज लाइनहाजिर हुए हैं। हालांकि इस पूरे प्रकरण में बिल्सी एसएचओ की कार्यप्रणाली भी सवालों में घिर गई है। एसएसपी ने बताया कि पूरी जिम्मेदारी एसएचओ वजीरगंज की थी, इसलिए उन पर कार्रवाई हुई है। हालांकि विभागीय जांच जारी है। बिल्सी एसएचओ की संलिप्तता की भी सूचना है। मामला सही निकला तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय है।
