BHU ने तैयार की धान की नई वेरायटी:‘मालवीय धान-3’ के लिए पिछले 15 वर्षों से चल रहा था शोध, किसानों को मिलेगा यह धान


बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने धान की नई प्रजाति तैयार की है जिसके लिए यहां पर पिछले 15 वर्षों से शोध चल रहा है। इस नई प्रजाति का नाम रखा गया है मालवीय धान-3। कृषि विज्ञान संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग ने धान अनुसंधान में पुनः एक कदम आगे बढ़ाया है। इस विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्रवण कुमार सिंह के नेतृत्व में ‘अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान’ ( इरी ) फिलीपींस के सहयोग से 15 वर्षों के लगातार प्रयास से धान की नई किस्म ‘मालवीय धान-3’ विकसित की गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के ‘अखिल भारतीय समन्वित धान अनुसंधान परियोजना’ द्वारा ‘मालवीय धान -3’ को लगातार 3 वर्ष पूरे भारत में परीक्षण के आधार पर 17-18 अप्रैल, 2026 को ‘केंद्रीय धान अनुसंधान संस्थान’ कटक, ओडिशा में हुई ’61वीं वार्षिक धान अनुसंधान ग्रुप मीटिंग’ के ‘वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी’ द्वारा इस किस्म के उच्च उत्पादकता के आधार पर पास कर दिया गया है। अगले वर्ष किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी यह धान अब इस किस्म को कृषि मंत्रालय, भारत सरकार से नोटिफाई होने पर अगले वर्ष से किसानों को उपलब्ध होने की संभावनाएं हैं। आईसीएआर की ‘वैरायटी आईडेंटिफिकेशन कमेटी’ ने मालवीय धान-3 को उच्च उत्पादकता के आधार पर कई राज्यों के लिए पास किया है जैसे बिहार, उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, आसाम, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश । पतला और लंबा होगा इसका चावल इस किस्म की पूरे देश में औसत उपज 60.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है तथा देश में इसका औसत उत्पादन रेंज 59.89 से 61.03 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है जो कि राष्ट्रीय चेक वैरायटी, ‘एनडीआर-359’ से 18.19% ज्यादा है। इसका हलिंग प्रतिशत 79.8% तथा मिलिंग प्रतिशत 70.6% है। इसका औसत एचआरआर (खड़ा चावल प्रतिशत) 58.5% है। इसका चावल पतला एवं लंबा (6.7 मिमी 2.2 मिमी) है। इसका एमाइलोज प्रतिशत 24.1% है। इसका पौधा मध्यम बौना (114 – 120 सेमी लंबा) है। यह रोपाई विधि में 132 -139 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह किस्म धान के प्रमुख रोगों एवं कीटों के लिए मध्यम प्रतिरोधी/मध्यम सहनशील है, जैसे- लीफ ब्लास्ट के लिए तथा बैक्टीरियल ब्लाइट के लिए मध्यम प्रतिरोधी, नेक ब्लास्ट के लिए प्रतिरोधी तथा प्लांट हॉपर के लिए मध्यम सहनशील है। इनका रहा अहम योगदान मालवीय धान-3 प्रोफेसर श्रमण कुमार सिंह के नेतृत्व में उनके टीम के वैज्ञानिकों- डॉ आकांक्षा सिंह, डॉ धीरेंद्र कुमार सिंह, डॉ राकेश कुमार सिंह, डॉ निखिल कुमार सिंह तथा इरी फिलीपींस के वैज्ञानिकों – डॉ विकास कुमार सिंह, डॉ संकल्प भोसले, डॉ पल्लवी सिन्हा, डॉ चल्ला वेंकटस्वरलू तथा भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के डॉ साईं प्रसाद ने मिलकर तैयार किया है

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