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संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक जारी रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल को होगी। आज रजिस्टर्ड नंबर पर केस नहीं आ पाने के कारण सुनवाई टल गई। यह रोक संभल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर के उस आदेश पर लगी है, जिसमें अनुज चौधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। एएसपी अनुज चौधरी और संभल पुलिस ने लोअर कोर्ट के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता यामीन के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। अदालत ने उत्तर दाखिल करने के लिए 21 अप्रैल तक का समय दिया था। संभल निवासी यामीन की याचिका पर सीजेएम ने 9 जनवरी 2025 को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद फिरोजाबाद में तैनात एएसपी अनुज चौधरी ने 29 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अनुज चौधरी की ओर से एक याचिका दायर की थी।
9 फरवरी 2025 सीजेएम ने रोक लगा दी थी
इस याचिका पर 9 फरवरी 2025 को करीब दो घंटे तक पहली सुनवाई हुई थी। 10 फरवरी 2025 को न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तत्कालीन सीजेएम के आदेश पर रोक लगा दी थी। 6 फरवरी 2024 को याचिका दायर हुई थी
संभल के थाना नखासा क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय निवासी यामीन ने 6 फरवरी 2024 को सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की थी। यामीन ने आरोप लगाया कि उनका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को ‘रस्क’ (खाद्य पदार्थ) बेचने के लिए घर से निकला था। शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचने पर पुलिस ने उसे गोली मार दी थी। यामीन ने अपनी याचिका में तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी और संभल कोतवाली इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था।
24 नवंबर 2024 को हिंसा भड़की 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ और दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को किया गया, इस दौरान हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। सर्वे को बाधित करते हुए हिंसा भड़क गई, पुलिस पर पथराव-फायरिंग की गई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित ASP अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए।
2750 से ज्यादा लोगों पर दर्ज हुआ था मुकदमा
संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क एवं सपा विधायक इक़बाल महमूद के बेटे सुहैल इक़बाल सहित कई लोगों को नामजद करते 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया, हालांकि चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर विधायक पुत्र का नाम निकाल दिया गया।
जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 158 अभियुक्तों को जेल भेज चुकी है, जिसमें 3 महिलाएं और संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस एवं गुलाम भी शामिल है, मुल्ला अफरोज पर NSA लगा है। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को बीती 1 अगस्त 2025 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था, 24 मार्च को उन्हें जेल भेजा गया था और 131 दिन के बाद जेल से बाहर आए थे। आपको बता दे कि काफी अभियुक्त की जमानत इलाहाबाद हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट से हो चुकी है।
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