4 घंटे पहले
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खेल मंत्रालय ने मंगलवार को राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 का ऐलान कर दिया है। 12 साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी खिलाड़ी को खेल रत्न नहीं दिया गया हो। इससे पहले 2014 में ऐसा हुआ था।
इस साल 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इनमें चेस खिलाड़ी दिव्या देशमुख, विदित गुजराती, एथलीट तेजस्विन शंकर और बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद व तृषा जॉली जैसे नाम शामिल हैं।
फुटबॉल के दिग्गज 84 साल के आई. अरुमायनायगम को अर्जुन अवॉर्ड की लाइफटाइम कैटेगरी में चुना गया है। वे 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे।

तेजस्विन ने क्रिकेट से की शुरुआत
तेजस्विन शंकर के पिता चाहते थे कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें और खेलना ही है तो क्रिकेट खेलें। स्कूल कोच ने उनकी एथलेटिक क्षमता पहचानी। धीरे-धीरे तेजस्विन ने हाई जंप को अपना लिया। 17 साल की उम्र में उन्होंने 2.26 मीटर की छलांग लगाकर सीनियर नेशनल रिकॉर्ड तोड़ दिया।

यह भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला मेडल था।
एथलेटिक्स के लिए पिता को चिट्ठी लिखी
- 15 साल के तेजस्विन ने अपने पिता को एक भावुक चिट्ठी लिखकर एथलेटिक्स जारी रखने की इजाजत मांगी। पिता मान गए, हालांकि इसके कुछ समय बाद ही उनका निधन हो गया।
- तेजस्विन के करियर में बड़ा मोड़ आया 2022 में। उन्होंने 2.27 मीटर का कॉमनवेल्थ गेम्स क्वालिफाइंग मार्क हासिल किया। वे ऐसा करने वाले इकलौते भारतीय थे, फिर भी बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए उनका नेशनल टीम में सिलेक्शन नहीं हुआ।
- तेजस्विन ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट के आदेश पर उन्हें टीम में शामिल किया गया। तेजस्विन ने बर्मिंघम में 2.22 मीटर की छलांग लगाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता।

दिव्या ने FIDE विमेंस वर्ल्ड कप का खिताब जीता था
चेस में दिव्या देशमुख और विदित गुजराती को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। दिव्या ने 2025 में FIDE विमेंस वर्ल्ड कप का खिताब जीता था।
बैडमिंटन में गायत्री गोपीचंद और त्रिशा जॉली को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। दोनों महिला डबल्स में भारत की प्रमुख खिलाड़ियों में रही हैं।

त्रिसा जॉली-गायत्री गोपीचंद ने 2025 में जीता था सैयद मोदी इंटरनेशनल का महिला डबल्स खिताब।
90 के दशक में खेल रत्न पुरस्कार की शुरुआत हुई
1991-92 में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने खेल रत्न पुरस्कार की शुरुआत की थी। उस समय इसका नाम राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार था। 2021 में इसका नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया गया।


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