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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 1981 के एक अपहरण मामले में दोषी ठहराए गए तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने दिया है। इटावा की सत्र अदालत ने 1985 में तीनों को आरोप का दोषी मानते हुए सात साल कैद की सजा सुनाई थी।
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जानिये क्या है मामला
मामले के तथ्यों के अनुसार 10 अक्टूबर 1981 को इटावा के नगला गौर गांव के पास पुरानी रंजिश के कारण कालीचरण के दो भाइयों मुन्नी लाल व राम स्वरूप के अपहरण का आरोप लगा था। 18 जनवरी 1985 को ट्रायल कोर्ट ने जयवीर सिंह, बूरन सिंह, श्री चंद, श्याम सिंह व रणजीत सिंह को आईपीसी की धारा 364 के तहत दोषी ठहराया था। अपील लंबित रहने के दौरान श्याम सिंह और रणजीत सिंह की मृत्यु हो गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में न तो अपहृत व्यक्तियों का कोई सुराग मिला और न ही उनकी हत्या या चोट से जुड़ा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किया गया। घटना शाम के समय हुई थी लेकिन मौके पर पर्याप्त रोशनी का कोई प्रमाण नहीं था। कोर्ट ने लंबे समय बाद केवल अदालत में हुई पहचान को पर्याप्त नहीं माना।
घटनास्थल पर अन्य लोग मौजूद होने के बावजूद किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया, केवल रिश्तेदारों के बयान पर सजा देना भी कोर्ट ने असुरक्षित माना। कोट ने कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे आरोप सिद्ध करने में विफल रहा इसलिए आरोपी संदेह के लाभ के हकदार हैं।