AI से गले की कैंसर को होगी पहचान:पहली इंडोस्कोपी से पहचान का दावा, LU प्रोफेसर ने डेवलप किया मॉडल


लखनऊ विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग ने गले में होने वाले कैंसर की जल्दी पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) मॉडल तैयार किया है। दावा है कि पहली इंडोस्कोपी में ही यह मॉडल कैंसर की पहचान करने में सक्षम होगा। यह शोध मंगलवार को प्रतिष्ठित जर्नल स्प्रिंगर नेचर में प्रकाशित हुआ है। इस शोध में विभाग के डा. पुनीत मिश्रा, शोधार्थी मो. उस्मान, डा. सिद्धार्थ और ईएनटी विशेषज्ञ डा. राकेश श्रीवास्तव ने अपना सहयोग दिया है। डा. पुनीत मिश्रा ने बताया कि लैरींजियल कार्सिनोमा, जिसे आम भाषा में गले का कैंसर कहा जाता है, दुनिया भर में और विशेष रूप से दक्षिण एशिया में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। पारंपरिक रूप से, वोकल कार्ड की सामान्य गांठों, कैंसर-पूर्व की गंभीर स्थितियों और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए दर्दनाक बायोप्सी या दशकों के अनुभव वाले विशेषज्ञों की आवश्यकता होती थी। नैरो-बैंड इमेजिंग तकनीक ने विशिष्ट प्रकाश तरंगदैर्ध्य का उपयोग करके श्लेष्मा झिल्ली की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को स्पष्ट रूप से दिखाकर इस प्रक्रिया को बेहतर बनाया था, लेकिन इन जटिल रक्त वाहिकाओं के पैटर्न को समझने में मानवीय चूक की संभावना हमेशा बनी रहती थी। अब उन्नत एआइ मॉडल ने इस समस्या को हल कर दिया है। एआइ सिस्टम एनबीआइ छवियों को तेजी से स्कैन करता है, प्रभावित क्षेत्र की सटीक पहचान करता है और गले के ऊतकों को अत्यधिक सटीकता के साथ अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। दावा है कि शुरुआती चरणों में ही इस तकनीक के जरिए कैंसर का पता लगाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक होने योग्य स्थिति में बदल रही है।

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