Administration-Muslim Community Agreement on Namaz

भोजशाला की बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 611 और 612 स्थित जमीन पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी है।

धार के भोजशाला विवाद में जुमे की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान तय हो गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भोजशाला परिसर की बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 611 और 612 स्थित भूमि पर नमाज प

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कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने बताया कि भोजशाला परिसर की बाउंड्रीवॉल से लगी इसी जमीन पर नमाज अदा की जाएगी। समाज की ओर से प्रशासन के साथ समन्वय बनाया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उधर, विक्रम नगर के रहवासियों ने प्रशासन के फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई है। स्थानीय निवासी अभिनव बिजवा ने बताया कि जिस जमीन पर नमाज की अनुमति दी गई है, उस पर उनका और अन्य परिवारों का वर्षों पुराना पुश्तैनी कब्जा है। वे लंबे समय से इस पर खेती करते आ रहे हैं।

भोजशाला से सटी इस जमीन पर जुमे की नमाज पढ़ी जाएगी।

भोजशाला से सटी इस जमीन पर जुमे की नमाज पढ़ी जाएगी।

प्रशासन ने दोपहर 12 बजे तक दस्तावेज देने को कहा

अभिनव बिजवा ने कहा- यदि प्रशासन नमाज के लिए हमारी जमीन को समतल करने या दूसरी कोई कार्रवाई के लिए पहुंचता है, तो हम इसका विरोध करेंगे। बिना स्वामित्व स्पष्ट किए किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उन्हें शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक संबंधित जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज पेश करने का समय दिया है। वे निर्धारित समय के भीतर सभी दस्तावेज प्रशासन को सौंप देंगे। यदि जरूरत पड़ी तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

तय जमीन से कमाल मौलाना मस्जिद दिखती है, इसलिए चुना

भोजशाला से सटी खसरा नंबर 611 और 612 की जिस जमीन पर नमाज की अनुमति दी गई है, वहां से कमाल मौलाना मस्जिद सीधे दिखाई देती है। मुस्लिम समाज का कहना था कि जिला प्रशासन द्वारा पहले प्रस्तावित जगह पर नमाज अदा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

अब्दुल समद ने बताया कि जिस जमीन पर नमाज पढ़ी जानी है, वहां बारिश के कारण कीचड़ हो गया है। इसके अलावा उस जमीन पर खेती भी की जा रही है, इसको देखते हुए प्रशासन से नमाज स्थल तक सुरक्षित पहुंच मार्ग तैयार करने का अनुरोध किया गया है। वजू के लिए पानी, सुरक्षा और यातायात की व्यवस्था कराने की मांग भी की गई है।

भोजशाला के पास जुमे की नमाज को लेकर प्रशासन और मुस्लिम समाज की बैठक हुई थी।

भोजशाला के पास जुमे की नमाज को लेकर प्रशासन और मुस्लिम समाज की बैठक हुई थी।

इससे पहले चालीसपीर दरगाह में नमाज पढ़ने कहा गया था

14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान मुहैया कराया जाए। इसके बाद जिला प्रशासन ने मालीवाड़ा गांव में चालीसपीर दरगाह के पास नमाज की जगह निर्धारित की थी, लेकिन मुस्लिम समुदाय ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया गया स्थान भोजशाला से करीब दो किलोमीटर दूर है और यह कोर्ट के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है। इस पर अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को भोजशाला परिसर के बाहर या उससे सटे क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।

मुस्लिम समाज ने मालीवाड़ा गांव में जुमे की नमाज पढ़ने से मना कर दिया था।

मुस्लिम समाज ने मालीवाड़ा गांव में जुमे की नमाज पढ़ने से मना कर दिया था।

दावा किया था- पहले भी कभी नहीं बिगड़ा माहौल

कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने कहा था कि जब भोजशाला परिसर में नमाज होती थी, तब भी कभी कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़ी। नमाज बंद होने के बाद भी कोई विवाद नहीं हुआ, इसलिए इतनी दूर वैकल्पिक व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं है।

सदर ने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि इससे पहले 23 जनवरी को बसंत पंचमी के मौके पर प्रशासन ने जिस जगह पर डमी नमाज कराई थी, वह दरअसल कब्रिस्तान की जमीन है। उस समय भी मुस्लिम समाज ने इस पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि कब्रिस्तान में जुमे की नमाज अदा नहीं की जाती। यह पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट के सामने मजबूती से रखा गया था।

बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समाज ने भोजशाला परिसर के इसी स्थान पर नमाज अदा की थी।

बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समाज ने भोजशाला परिसर के इसी स्थान पर नमाज अदा की थी।

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भोजशाला के बिलकुल पास दें नमाज की जगह

धार की ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि कोर्ट के 14 जुलाई के अंतरिम आदेश का केवल औपचारिक नहीं, बल्कि उसकी मूल भावना के अनुरूप अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। पढ़ें पूरी खबर…

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