ADM-भाकियू कार्यकर्ताओं में नोकझोंक, धरने पर युवती बेहोश:मुजफ्फरनगर में चकबंदी भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन, आंदोलन का ऐलान


मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट में चकबंदी विभाग के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का धरना सोमवार शाम हंगामे में बदल गया। वार्ता के लिए पहुंचे एसडीएम और किसान नेताओं के बीच तीखी बहस हो गई। इसी दौरान धरने पर बैठी एक युवती की तबीयत बिगड़ने से वह बेहोश हो गई। घटना के बाद किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। मुजफ्फरनगर के कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले किसान चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों के विरोध में धरना दे रहे थे। सुबह से जारी धरने के दौरान किसानों ने अधिकारियों पर रिश्वतखोरी और किसानों का उत्पीड़न करने के आरोप लगाए। किसान नेताओं के अनुसार, पहले प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम (वित्त) से वार्ता की, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद एसडीएम राजकुमार धरनास्थल पर पहुंचे। बातचीत के दौरान किसान नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया। भाकियू के एनसीआर अध्यक्ष विकास शर्मा ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान एसडीएम का रवैया किसानों के प्रति असंवेदनशील और अभद्र था। उनका कहना है कि एक पीड़ित युवती ने अपनी जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग रखी थी, जिस पर एसडीएम की कथित टिप्पणी से किसान भड़क गए। विवाद के बीच धरने में शामिल एक युवती अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने उसे संभाला और प्राथमिक उपचार दिलाया। किसान नेताओं का आरोप है कि प्रशासनिक दबाव और तनावपूर्ण माहौल के कारण युवती की तबीयत बिगड़ी। धरनारत किसानों ने चकबंदी विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों से रिश्वत मांगी जाती है और भुगतान न करने पर उनके चक दूर-दराज क्षेत्रों में आवंटित कर दिए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने समस्याओं का समाधान नहीं किया। किसान नेताओं का कहना है कि धरने में शामिल युवती भी लंबे समय से अपनी जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही है, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिला। कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक चकबंदी विभाग के कथित भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती और किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। संगठन ने आंदोलन को अनिश्चितकालीन बताते हुए प्रशासन पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। धरनास्थल पर देर शाम तक किसान डटे रहे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। वहीं प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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