आगरा की 20 हजार वर्ग मीटर सीलिंग जमीन का मामला:19 साल बाद दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज किया


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा की अर्बन लैंड सीलिंग जमीन के एक पुराने मामले में 19 साल की देरी से दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मूल भू-स्वामी पूरी कार्यवाही से वाकिफ था, उसने आपत्तियां और अपील तक की थी। न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव तथा न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने दीपक की याचिका पर यह फैसला सुनाया। क्या है मामला जानिये विवादित जमीन ग्राम नगला डीम, मौजा बसई, तहसील सदर, जिला आगरा की है। मूल भू-स्वामी लेखराम पिता ईश्वरी थे, जो याची प्रथम के पिता व याची द्वितीय के पति हैं। लेखराम ने 14.अगस्त.1976 को सीलिंग रिटर्न दाखिल किया था। याचियों का कहना था कि वह आज भी काबिज हैं, राज्य ने कभी कब्जा नहीं लिया। राज्य सरकार ने जवाब दिया राज्य सरकार का कहना था कि धारा 8(3) का नोटिस 17.जून.1978 को जारी होकर 26 जून1978 को मकान पर चस्पा कर तामील हुआ। कोई आपत्ति न आने पर 23 जुलाई 1979 को धारा 8(4) में 20,807 वर्ग मीटर जमीन सरप्लस घोषित हुई। बाद में लेखराम ने 28.मार्च.1980 को प्रार्थना पत्र दिया, जिसे स्वीकार कर गाटा नं. 675 व 688 को सीलिंग से मुक्त कर अन्य गाटों से एक्सचेंज किया गया। धारा 10(1) की अधिसूचना 28.जून.1980 को गजट में आई, लेखराम ने 15.दिसंबर 1980 को आपत्ति की जो 20.जनवरी .1981 को खारिज हुई। लेखराम ने जिला जज आगरा के समक्ष अपील दायर की, जो 28.जनवरी .1982 को खारिज हो गई। धारा 10(3) की अधिसूचना 27.फरवरी.1982 को गजट में प्रकाशित हुई। रिकॉर्ड में राज्य का नाम दर्ज हुआ धारा 10(5) का नोटिस 31.मार्च.1993 को जारी हुआ, भू-स्वामी घर पर न मिलने पर 15.जून.1993 को दो गवाहों के समक्ष मकान पर चस्पा किया गया। 30 दिन बाद विरोध न होने पर कब्जा स्वतः राज्य को हस्तांतरित मान लिया गया। परवाना अमल दरामद तहसील को भेजकर राजस्व रिकॉर्ड में राज्य का नाम दर्ज हो गया। याची दीपक का प्रत्यावेदन खारिज हुआ। कोर्ट ने मूल पत्रावली देखकर कहा कि लेखराम पूरी कार्यवाही से वाकिफ था। कानून में कब्जा लेने के दो तरीके हैं – धारा 10(5) में स्वैच्छिक कब्जा और धारा 10(6) में बलपूर्वक कब्जा। यहां स्वैच्छिक कब्जा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। कोर्ट ने कहा कब्जे को लेकर याची चाहे तो दीवानी वाद दायर कर सकता है।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *