लैंड बैंक के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करेगा GDA:काश्तकारों से बातचीत करेंगे; जमीन चिह्नित करने की जिम्मेदारी निभाएंगे


गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) नई विकास योजनाओं के लिए लैंड बैंक बनाने को कंसल्टेंट नियुक्त करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) के जरिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैँ। 14 अक्टूबर तक इच्छुक फर्में आवेदन कर सकेंगी। चयनित की जाने वाली फर्म जमीन की तलाश करेगी और जमीन के मालिक से बात कर उसे प्राधिकरण के पक्ष में रजिस्ट्री कराने में अपना योगदान देगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के लिए चिह्नित जमीन के साथ अन्य क्षेत्रों में भी भूमि खरीद और लैंड पूलिंग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। चयनित कंसल्टेंट एजेंसी जमीन मालिकों से बातचीत और मोलभाव करने, राजस्व अभिलेख जुटाने, जमीन का सर्वे कराने और स्वामित्व से जुड़े मामलों की जांच में सहयोग करेंगी। जमीन खरीद या लैंड पूलिंग का मॉडल भू-स्वामियों की आपसी सहमति और लागू नीतियों के अनुसार अपनाया जाएगा। कंसल्टेंट एजेंसी को आधुनिक तकनीक से सर्वे कराना होगा। इसके लिए ड्रोन सर्वे, डीजीपीएस और उच्च गुणवत्ता वाली सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। जमीन के नक्शों को जीआईएस पर डिजिटल करने, भूखंडों के स्वामित्व का ब्योरा जुटाने और खसरा-वार रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी भी होगी। रिपोर्ट में जमीन के स्पष्ट स्वामित्व, विवाद, मुकदमे और अन्य बाधाओं का ब्योरा देना होगा। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जमीन जुटाने के दौरान मुख्य और सहायक सड़कों के किनारे स्थित भूखंडों को प्राथमिकता देते हुए चरणबद्ध योजना तैयार करनी होगी। बिखरे हुए भूखंडों के बजाय आपस में जुड़े भूखंड जुटाने पर जोर रहेगा, ताकि विकास योजनाओं को लागू करने में आसानी हो। एजेंसियों को हर महीने जमीन खरीद और लैंड पूलिंग की प्रगति की रिपोर्ट भी देनी होगी। EOI के तहत आवेदन के लिए 11,800 रुपये (जीएसटी सहित) प्रोसेसिंग शुल्क और दो लाख रुपये की ईएमडी ऑनलाइन जमा करनी होगी। चयन न्यूनतम प्रति हेक्टेयर दर के आधार पर होगा। इस दर से सहमत पात्र एजेंसियों को भी सूचीबद्ध किया जाएगा। अनुबंध की अवधि 12 महीने होगी, जबकि आवेदन की वैधता 180 दिन निर्धारित की गई है। ड्रोन सर्वे से जुटाएंगे जमीन का ब्योरा
चिह्नित क्षेत्रों में डीजीपीएस, ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों से सर्वे कराया जाएगा। राजस्व नक्शों को जीआईएस पर डिजिटल करने के साथ भूखंडों के स्वामित्व का रिकॉर्ड भी तैयार होगा। कंसल्टेंट एजेंसियां खसरा-वार रिपोर्ट तैयार करेंगी। इसमें जमीन के स्वामित्व, कोर्ट केस, अन्य बाधाओं और सरकारी भूमि का विवरण शामिल होगा। प्रभावित भवनों, परिसंपत्तियों और पेड़ों का सर्वे भी कराया जाएगा।

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