हाथी पर सवार होकर आएंगी माता, कल से शारदीय नवरात्र:18 अक्टूबर को महागौरी स्वरूप की पूजा के साथ ही घरों में हवन और कन्या पूजन होगा


धर्म-अध्यात्म और आस्था का महापर्व शारदीय नवरात्रि इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस शक्ति आराधना के उत्सव को लेकर देवी भक्तों में अभी से भारी उत्साह देखा जा रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन बेहद शुभ और सुख-समृद्धि कारक वाहन हाथी पर हो रहा है, जो देश-दुनिया के लिए खुशहाली का संकेत है। उदयातिथि के सिद्धांत के आधार पर नवरात्रि का पहला व्रत और कलश स्थापना का अनुष्ठान 11 अक्टूबर को ही संपन्न किया जाएगा। मुरादाबाद के प्रसिद्ध ज्योतिर्विद सुरेंद्र आचार्य ने पंचांग गणना के हवाले से बताया कि इस साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:15 बजे से शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन यानी 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदयातिथि की महत्ता के कारण 11 अक्टूबर को ही नवरात्रि का पहला दिन माना जाएगा और इसी सुबह घटस्थापना की जाएगी। सुरेंद्र आचार्य के अनुसार, भक्तों के लिए कलश स्थापना का पहला और सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 6 बजकर 28 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। जो श्रद्धालु किसी कारणवश सुबह कलश स्थापित नहीं कर पाएंगे, उनके लिए दोपहर में दूसरा शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेगा। यह दोपहर 11:42 बजे से 12:32 बजे तक रहेगा, जिसे अभिजित मुहूर्त कहा जाता है। शास्त्रों में नवरात्रि के प्रारंभ होने वाले दिन के आधार पर माता की सवारी तय होती है। इस बार नवरात्रि का शुभारंभ रविवार को हो रहा है, इसलिए मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि देवी का हाथी पर आना अत्यंत शुभ होता है। इसे जीवन में सुख, शांति, अच्छी वर्षा और धन-धान्य की प्रचुरता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस वर्ष पर्व की कड़ियों में महाअष्टमी 18 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जिसकी शुरुआत सुबह 8:29 बजे से होगी। इस दिन माता के महागौरी स्वरूप की पूजा के साथ ही घरों में हवन और कन्या पूजन का विधान संपन्न होगा। इसके अगले दिन 19 अक्टूबर को सुबह 10:52 बजे से महानवमी तिथि लगेगी, जहां मां सिद्धिदात्री की उपासना के साथ कई श्रद्धालु व्रत का पारण करेंगे। हालांकि, पारण की यह परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार भिन्न भी हो सकती है। अंत में, नौ दिनों की अखंड साधना के समापन पर 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरे का महापर्व परंपरागत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

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