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गोरखपुर में जिला अस्पताल से 10 साल की बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या मामले में मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पाक्सो शमीम अहमद अंसारी की अदालत में जिला अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य के रूप में साबित किया गया। फुटेज तैयार करने वाले हॉस्पिटल के कर्मचारी श्रीनिवास सिंह का अभियोजन की ओर से मुख्य बयान दर्ज हुआ। पेनड्राइव में सुरक्षित फुटेज दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की मौजूदगी में कोर्ट में चलाकर दिखाई गई। गवाह की क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए सात अक्टूबर की तारीख तय की गई है। पेनड्राइव कोर्ट में चलाई गई विशेष लोक अभियोजक राघवेंद्र त्रिपाठी ने श्रीनिवास सिंह को गवाह के रूप में पेश किया। उन्होंने जिला अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों से फुटेज तैयार किए जाने और उसे सुरक्षित रखने के संबंध में बयान दिया। इसके बाद पेनड्राइव कोर्ट में चलाई गई। अब बचाव पक्ष गवाह की प्रति परीक्षा करेगा। मामले में अभियोजन की ओर से अब तक पांच गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। इनमें बच्ची के पिता, उसकी बड़ी बहन, सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञ, मुकदमा दर्ज करने वाले कोतवाली थाने के दीवान और विद्यालय की प्रधानाचार्य शामिल हैं। प्रधानाचार्य ने भी न्यायालय में स्कूल की सीसीटीवी फुटेज प्रमाणित की थी। जानिए क्या था पूरा मामला… 28 जुलाई की रात को जिला अस्पताल में भर्ती अपनी बड़ी बहन को खाना देने गई बच्ची अचानक गायब हो गई थी। परिजनों की तलाश में पता चला कि पुलिस की वर्दी पहने एक युवक उसे ले गया है। सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस की मदद से जांच आगे बढ़ी, तो खुलासा हुआ कि डायल 112 में तैनात सिपाही अभिषेक यादव (निवासी गाजीपुर) ने बच्ची का अपहरण किया है। हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर आरोपी ने माना कि उसने रेप के बाद बच्ची की हत्या कर दी। 30 जुलाई को चिउटहा में रोहिन नदी के किनारे बच्ची की लाश मिली थी। इसके बाद आरोपी सिपाही को नौकरी से बर्खास्त कर जेल भेज दिया गया।
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गोरखपुर जिला अस्पताल का CCTV कोर्ट में साबित हुआ:बच्ची से रेप और हत्या मामले में छठवें गवाह का बयान दर्ज, आज होगी अगली सुनवाई