मिर्जापुर में स्कूल की जमीन को लेकर राजस्व-वन विभाग आमने-सामने:2.5 घंटे जांच के बाद भी नहीं सुलझा पेंच, कल फिर होगी पैमाइश


मिर्जापुर के हलिया विकासखंड के लहुरियादह गांव में जूनियर हाईस्कूल के निर्माण के लिए चिह्नित जमीन को लेकर राजस्व और वन विभाग आमने-सामने आ गए हैं। पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के सवाल के बाद शुरू हुई पड़ताल में मंगलवार को राजस्व विभाग की टीम ने करीब ढाई घंटे तक अभिलेख, नक्शे और मौके की स्थिति का मिलान किया, लेकिन जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। अब बुधवार को दोबारा पैमाइश कराने का निर्णय लिया गया है। मंगलवार को हलिया तहसीलदार विशाल शर्मा, नायब तहसीलदार विजय यादव और एबीएसए प्रकाश चंद यादव समेत राजस्व विभाग की टीम लहुरियादह पहुंची। मौके पर वन विभाग के दरोगा और राजस्व विभाग के कर्मचारी भी मौजूद रहे। टीम दोपहर करीब डेढ़ बजे गांव पहुंची और शाम चार बजे तक जमीन से जुड़े अभिलेखों, नक्शों और मौके की स्थिति का मिलान करती रही। अधिकारियों ने विद्यालय निर्माण के लिए चिह्नित जमीन की सीमाओं और वास्तविक स्थिति को समझने के लिए मौके पर नापजोख भी की। नक्शे और मौके की जमीन में स्थिति नहीं हुई साफ विद्यालय निर्माण के लिए चिह्नित भूमि को लेकर विभागों के बीच मतभेद सामने आया है। राजस्व टीम ने नक्शे में दर्ज स्थिति का मौके की जमीन से मिलान किया। करीब ढाई घंटे तक अधिकारी और कर्मचारी जमीन से जुड़े पेंच को सुलझाने में जुटे रहे, लेकिन कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकल सका। पूर्व डीएम के सवाल के बाद शुरू हुई पड़ताल लहुरियादह में विद्यालय निर्माण का मामला उस समय चर्चा में आया, जब पूर्व डीएम दिव्या मित्तल ने विद्यालय निर्माण की स्थिति पर सवाल उठाया था। इसके बाद जमीन को लेकर विभागीय स्तर पर पड़ताल शुरू हुई। निर्माण स्थल पर काम शुरू होने के बाद जमीन की स्थिति को लेकर विवाद सामने आया। इसके चलते रविवार को विद्यालय का निर्माण कार्य रोक दिया गया था। ग्रामीण बोले- लंबे समय से स्कूल भवन की जरूरत ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विद्यालय भवन का निर्माण लंबे समय से जरूरत है। निर्माण शुरू होने से ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी, लेकिन अब जमीन को लेकर विभागों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं होने से काम रुक गया है। बुधवार को फिर होगी जमीन की पैमाइश राजस्व विभाग की टीम बुधवार को दोबारा मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश करेगी। इसके बाद अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि विद्यालय निर्माण के लिए चिह्नित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और निर्माण कार्य किस जमीन पर कराया जा सकता है।

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