थप्पड़ कांड के बाद एकजुट हो रहे क्षत्रिय:बांसगांव में लगाई महापंचायत; अंशुमान सिंह को समर्थन दिया; आज बाजार बंद रखेंगे


पत्रकारवार्ता के दौरान 4 अक्टूबर को सपा नेताओं के बीच हुआ विवाद अब जातिगत मोड़ लेता जा रहा है। पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी के पक्ष में निषाद समाज के लामबंद होने के बाद अब क्षत्रिय समाज भी एकजुट होने लगा है। सोमवार को बांसगांव में क्षत्रियों ने महापंचायत लगाई। 3 घंटे से अधिक समय तक यहां आपस में चर्चा हुई। सभी ने एक स्वर में अंशुमान सिंह को अपना समर्थन दिया है। नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि विजय कुमार सिंह बबलू के आह्वान पर बांसगांव कस्बे की सभी दुकानें बंद रहेंगी। इस मामले में विभिन्न मांगों को लेकर एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। इस महापंचायत को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने संजय निषाद के उस बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें उन्होंने कहा था ‘कोई हाथ उठाए तो हाथ काट दो, जमानत मैं करा लूंगा’। वक्ताओं ने डा. संजय निषाद को चेतावनी भी दी। इस महापंचायत में 2000 से अधिक लोग एकत्र हुए थे। पहले जानिए क्या है मामला 4 अक्टूबर को सपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार गौतम ने लोकतंत्र बचाओ सप्ताह के अंतर्गत पत्रकारवार्ता की। इसमें सपा के प्रमुख नेताओं को बुलाया गया था। वहां पूर्व जिलाध्यक्ष एवं गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से टिकट के दावेदार नगीना प्रसाद साहनी भी पहुंचे थे। इसी विधानसभा क्षेत्र से तैयारी कर रहे अंशुमान सिंह को भी बुलाया गया था। अपराह्न 2 बजे के करीब वह भी अपने पुत्र कमलेश व समर्थकों के साथ प्रेसक्लब पहुंचे। नगीना प्रसाद साहनी, लोकसभा का चुनाव लड़ चुकीं काजल निषाद के बगल में बैठे थे।
काजल व नगीना प्रसाद साहनी की कुर्सियों के बीच में थोड़ा गैप था। अंशुमान सिंह के लिए कुर्सी लगाने के लिए उनके पुत्र कमलेश सिंह ने नगीना प्रसाद साहनी को कुर्सी खिसकाने को कहा। जिसके बाद जगह न होने का हवाला दिया गया। इसी बात पर बहस शुरू हो गई। नगीना प्रसाद साहनी भी कुर्सी से खड़े हो गए। वीडियो में कमलेश भी उनके पास आते दिखे। वहां भी बहस हुई और फिर कमलेश ने नगीना को थप्पड़ मार दिया। इसी के बाद से इस मामले ने तूल पकड़ लिया। मामले में राजनीति शुरू हो गई। थोड़ी ही देर में सपा प्रमुख ने अंशुमान सिंह को पार्टी से निकाल दिया।
इधर अधिवक्ताओं के साथ नगीना प्रसाद साहनी कैंट थाने पहुंचे और अंशुमान, उनके पुत्र कमलेश सिंह एवं अन्य पर एफआईआर दर्ज कराई। अगले ही दिन अखिलेश यादव ने गोरखपुर की जिला एवं महानगर कार्यकारिणी एवं सभी फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया। मामला निषाद समाज से जुड़ा होने के कारण भाजपा भी इस मामले में कूद पड़ी है। भाजपा के कई नेताओं ने इसे सपा की अराजकता के रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया है। इधर, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद ने भी सपा कार्यालय घेरने का ऐलान कर दिया। जिसके बाद सपा प्रमुख ने गोरखपुर की जिला व महानगर कार्यकारिणियों को भंग कर दिया। इसी बीच संजय निषाद का सुल्तानपुर में संबोधन का एक वीडिया आया, जिसमें वह हाथ उठाने वालों का हाथ काटने की बात कर रहे हैं। क्षत्रिय समाज ने इसे खुद से जोड़कर देखा है। मुख्यमंत्री तक भी ले जाएंगे मामला वक्ताओं ने कहा कि इस मामले को मुख्यमंत्री तक ले जाएंगे। सभी ने एक स्वर में अंशुमान सिंह को न्याय देने की मांग की है। वक्ताओं ने कहा कि एसडीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद एसएसपी व डीआईजी को भी ज्ञापन दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो सड़क भी जाम करेंगे। महापंचायत में बड़ी संख्या में अधिवक्ता भी मौजूद रहे। बांसगांव सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष यशवंत सिंह श्रीनेत, मंत्री विनय कुमार सिंह, कनिष्ठ उपाध्यक्ष मांधाता सिंह, गोला के हरिनरायन सिंह, रत्नेश्वर सिंह राजू, राणा प्रताप सिंह, विजय प्रताप सिंह राशू, पवन शाही कौशिक, कोठा के ज्ञानेंद्र सिंह आदि ने अपनी बात रखी। एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। एफआईआर से हत्या के प्रयास की धारा हटाने, परिवार के खिलाफ चल रहे कथित पुलिसिया उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की जाएगी।

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