सरफराज वारसी | बाराबंकी3 मिनट पहले
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बाराबंकी के गांवों में बकरी पालन अब आधुनिक तकनीक और महिला सशक्तिकरण के साथ जुड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रहा है। कृत्रिम गर्भाधान (AI) तकनीक के उपयोग से हजारों उन्नत नस्ल के मेमनों का जन्म हुआ है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इस बदलाव की अगुवाई महिलाएं कर रही हैं। गांधीनगर गांव की निशा प्रजापति क्षेत्र की अग्रणी एआई वर्कर के रूप में उभरी हैं। वह हर साल बड़ी संख्या में बकरियों का कृत्रिम गर्भाधान करती हैं। निशा के अनुसार, शुरुआत में इस काम में चुनौतियां थीं, लेकिन बेहतर परिणामों के बाद लोगों का भरोसा बढ़ा और सामाजिक सोच में भी परिवर्तन आया।
लगभग एक दशक पहले द गोट ट्रस्ट (The Goat Trust) ने इस तकनीक का पहला प्रदर्शन किया था। शुरुआती चरण में पुरुषों की भागीदारी अधिक थी, लेकिन चार साल पहले संस्था ने महिलाओं और लड़कियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। यह पहल अब एक बड़े परिवर्तन का आधार बन चुकी है।

अब गांवों में उन्नत नस्ल के वीर्य के माध्यम से स्थानीय बकरियों का गर्भाधान कराया जा रहा है। इससे मेमनों की गुणवत्ता, वजन और बाजार मूल्य में वृद्धि हो रही है। इसके अतिरिक्त, बकरियों को एक साथ हीट में लाने की तकनीक से उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है।
सामाजिक उद्यमी प्रो. संजीव कुमार ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्थानीय संसाधनों और महिलाओं को तकनीक से जोड़ना आवश्यक है। बाराबंकी में हो रहा यह बदलाव आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘पिंक रेवोल्यूशन’ न केवल आय बढ़ा रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर सामाजिक परिवर्तन भी ला रहा है।
