कुशीनगर के चंद्रपुर में लाखों के गबन का आरोप:ग्राम प्रधान, सचिवों पर कार्रवाई न होने से ग्रामीण नाराज


कुशीनगर के विकास खंड रामकोला की ग्राम पंचायत चंद्रपुर में ग्राम प्रधान और पूर्व व वर्तमान ग्राम पंचायत सचिवों पर सरकारी धनराशि के गबन का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और सरकारी धन की वसूली की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे पिछले चार वर्षों से लगातार शिकायतें कर रहे हैं। कई मामलों में जांच भी हुई, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायतकर्ताओं में अनिल यादव, बबलू गुप्ता, राजकुमार सिंह, सुरेश कुशवाहा और छोटेलाल यादव शामिल हैं। ग्रामीणों द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, ग्राम प्रधान घनश्याम कुशवाहा के खाते में वाई-फाई और नेट रिचार्ज के नाम पर दो वाउचरों के माध्यम से कुल 56,546 रुपये स्थानांतरित किए गए। इसमें वर्ष 2023 में तत्कालीन पंचायत सचिव सत्येंद्र सिंह द्वारा 32,546 रुपये और वर्ष 2025 में वर्तमान सचिव जयप्रकाश सिंह द्वारा 24 हजार रुपये का भुगतान किया गया। ग्रामीणों ने इस भुगतान को संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की है। सबसे गंभीर आरोप वर्ष 2020-21 में दिव्यांग कल्याण प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण, उपकरण खरीद और अन्य सुविधाओं के नाम पर 3.26 लाख रुपये के भुगतान को लेकर लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ग्राम पंचायत में ऐसा कोई केंद्र अस्तित्व में नहीं है, जबकि प्रिया सॉफ्ट पोर्टल पर भुगतान और कार्य दर्शाए गए हैं। उनका आरोप है कि तत्कालीन पंचायत सचिव आशुतोष कुमार सिंह के कार्यकाल में फर्जी अभिलेखों के आधार पर धन निकासी की गई। ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व में हुई जांचों में कई विकास कार्यों के मौके पर न मिलने के बावजूद भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बावजूद कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से विशेष टीम गठित कर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इस संबंध में जिला पंचायतराज अधिकारी आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। रामकोला के चन्दरपुर गांव में सामने आए वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने पंचायतीराज व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच रिपोर्टों में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब निगाहें जिलाधिकारी और पंचायतीराज विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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