अखाड़े से मायानगरी तक प्रगति चौहान का सफर:फौज का सपना छूटा तो पत्रकारिता की, एक दिन की शूटिंग ने बदल दी जिंदगी


पिता चाहते थे बेटी अखाड़े की मिट्टी में दांव-पेंच सीखे, लेकिन बेटी की आंखों में फौज की वर्दी का सपना था। हालात बदले तो पत्रकारिता की राह चुनी। फिर मीडिया इंटर्नशिप के दौरान एक दिन मॉडल के शूट पर नहीं पहुंचने से उन्हें कैमरे के सामने खड़े होने का मौका मिला। यही एक दिन उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना और मॉडलिंग से एंकरिंग, थिएटर और फिर अभिनय तक का रास्ता खुलता चला गया। यह कहानी है अलीगढ़ की ज्ञान सरोवर कालोनी में रहने वाली प्रगति चौहान की। घर की सबसे छोटी बेटी, लाड़-प्यार में पली और थोड़ी जिद्दी भी। पिता सुनील कुमार सिंह चौहान ने नाम प्रगति इसलिए रखा था कि बेटी जीवन में हमेशा आगे बढ़ती रहे। वह चाहते थे कि बेटी पहलवानी करे। वहीं प्रगति इसे अपने जीवन की पहली बगावत मानती हैं। उनका कहना है कि “मेरी सबसे पहली बगावत तो वहीं हुई।” फौज का सपना टूटा, भाई ने दिखाई पत्रकारिता की राह
बचपन से फौज में जाने का सपना था, लेकिन परिस्थितियों ने इसे आगे नहीं बढ़ने दिया। इसके बाद लॉ की पढ़ाई का विचार आया। राजपूत परिवार की सामाजिक और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच बड़े भाई अभिषेक चौहान ने उनके भीतर के बागी स्वभाव को पहचाना और पत्रकारिता की राह सुझाई। उनकी सीख थी कि राजपूताना केवल बंदिशों का नाम नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ समाज के उत्थान की जिम्मेदारी भी है। प्रगति मानती हैं कि भाई उनके ‘बैकबोन’ बनकर साथ नहीं खड़े होते तो शायद वह इतना आगे नहीं बढ़ पातीं। इसके बाद उन्होंने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। पहले ही वर्ष इंटर्नशिप और मीडिया में काम शुरू किया। रेडियो और न्यूज मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर काम ने उन्हें कैमरे और मीडिया की दुनिया से परिचित कराया। एक दिन की शूटिंग और बदल गई दिशा
इंटर्नशिप के दौरान मार्केटिंग शाखा की मॉडल एक दिन शूट पर नहीं आईं। प्रगति से पूछा गया कि क्या वह शूट कर सकती हैं। उन्होंने हां कह दी। यहीं से मॉडलिंग का रास्ता खुला। पेजेंट्स, फैशन शो और एंकरिंग के बाद उन्होंने मिस यूपी समेत विभिन्न पेजेंट्स में उपलब्धियां हासिल कीं। नेपाल फैशन वीक में शो-स्टॉपर बनीं और मैगजीन के कवर पेज पर भी जगह मिली। कामयाबी के साथ आलोचना आई तो मां उपासना चौहान ने उन्हें रास्ता दिखाया—हर बात का जवाब देने के बजाय अपनी मंजिल पर ध्यान रखो। “दुनिया की जलन का जवाब देने में वक्त मत गंवाओ, अपनी राह पर चलते रहो।” मॉडलिंग की चमक के बीच समाजसेवा
एक कार्यक्रम में गरीब बच्चों की मदद देखकर प्रगति सामाजिक कार्यों से जुड़ीं। वृद्धाश्रम और अनाथालयों में समय बिताने के साथ उन्होंने एसिड अटैक सर्वाइवर्स और दृष्टिहीन बच्चों के लिए कार्यक्रम किए। मिशन शक्ति के तहत गरीब, तलाकशुदा और जरूरतमंद महिलाओं की शादियों में सहयोग किया। अलीगढ़ जेल की महिलाओं को शिक्षा और काम के लिए प्रेरित करने तथा उनके बच्चों की सहायता की। कोविड में भोजन-दवाइयां पहुंचाईं, गर्मियों में पक्षियों के लिए जल-पात्र लगाए और त्योहारों पर घर से दूर सैनिकों के साथ राखी व दिवाली मनाई। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए प्रगति फाउंडेशन के जरिए समाजसेवा और जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली से मुंबई, अब हिंदी सिनेमा की ओर
दिल्ली में म्यूजिक एल्बम, थिएटर और मीडिया में काम करने के बाद प्रगति मुंबई पहुंचीं। यहां ZEE5 की ‘ग्यारह ग्यारह’, ‘बुद्ध’ में पार्वती, ‘महाराजा अग्रसेन’ और Sony TV के ‘CID’ में एपिसोडिक किरदार निभाए। शॉर्ट फिल्में, रियलिटी शोज और विज्ञापन फिल्मों में भी काम किया। मॉडलिंग और एंकरिंग के अनुभव के बाद उन्होंने अभिनय को अपना प्रमुख क्षेत्र चुना। अब हिंदी सिनेमा की नई परियोजनाओं में ‘Paid Palki’, ‘Aaoge Jab Tum’ और ‘DB’ शामिल हैं। उत्तराखंड में शूट हुई ‘Aaoge Jab Tum’ में उन्हें अनुभवी कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिला। संघर्ष में देवरा‍हा बाबा का आशीर्वाद
प्रगति स्वर्गीय संत शिरोमणि देवरा‍हा बाबा को अपना गुरु मानती हैं। उनका कहना है कि जीवन के उतार-चढ़ाव में बाबा के अमृत वचन उन्हें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की ताकत देते हैं। “मेरे जीवन की प्रगति में स्वर्गीय श्री देवरा‍हा बाबा की कृपा और उनका आशीर्वाद मेरे लिए सबसे बड़ी शक्ति है।” प्रगति की पहचान
मिस यूपी | पेजेंट्स | मैगजीन कवर | मॉडलिंग | नेपाल फैशन वीक शो-स्टॉपर | एंकरिंग | थिएटर | रेडियो | न्यूज मीडिया | ‘ग्यारह ग्यारह’ | ‘बुद्ध’ | ‘महाराजा अग्रसेन’ | ‘CID’ | शॉर्ट फिल्में | रियलिटी शोज | विज्ञापन फिल्में | समाजसेवा | प्रगति फाउंडेशन बास्केटबॉल, संगीत और फिल्में उनकी प्रमुख रुचियों में हैं। नाम की तरह आगे बढ़ती गईं
पहलवानी के अखाड़े से फौज के सपने तक, वहां से पत्रकारिता, मॉडलिंग, एंकरिंग और अभिनय होते हुए मुंबई और अब हिंदी सिनेमा तक, प्रगति के सफर में रास्ते कई बार बदले, लेकिन आगे बढ़ने की जिद नहीं बदली। ज्ञान सरोवर से मुंबई पहुंची प्रगति के लिए अलीगढ़ आज भी दिल के करीब है “अलीगढ़ के लिए प्रेम हमेशा रहेगा।”

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