अखाड़े से मायानगरी तक प्रगति चौहान का सफर:फौज का सपना छूटा तो पत्रकारिता की, एक दिन की शूटिंग ने बदल दी जिंदगी
पिता चाहते थे बेटी अखाड़े की मिट्टी में दांव-पेंच सीखे, लेकिन बेटी की आंखों में फौज की वर्दी का सपना था। हालात बदले तो पत्रकारिता की राह चुनी। फिर मीडिया इंटर्नशिप के दौरान एक दिन मॉडल के शूट पर नहीं पहुंचने से उन्हें कैमरे के सामने खड़े होने का मौका मिला। यही एक दिन उनकी…