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बांदा जनपद के बिसंडा के पुनाहुर गांव के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर 3 सितंबर को पकड़ी गई 30 हजार शीशियों कोडीनयुक्त कफ सिरप के मामले में अदालत के आदेश से कारोबार का एक और पहलू सामने आया है। सह-आरोपी रविंद्र गुप्ता के विवेचना में दर्ज बयान के अनुसार, कफ सिरप की खेप कागजों में हमीरपुर स्थित मेडिकल एजेंसी के नाम पर मंगाई जाती थी, लेकिन माल हमीरपुर के बजाय अतर्रा स्थित एक गोदाम में उतारा जाता था। मामले में आरोपी प्रवीण कुमार उर्फ लकी की जमानत अर्जी अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट) संजय कुमार सिंह प्रथम की अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने बरामदगी की मात्रा और रविंद्र गुप्ता के बयान को महत्वपूर्ण परिस्थितियों में माना। अदालत के आदेश के अनुसार रविंद्र ने बताया कि उसके सहयोगियों ने आधार कार्ड और पैन कार्ड लेकर उसके नाम पर मेडिकल लाइसेंस बनवाया था। ओम मेडिकल एजेंसी के लाइसेंस का इस्तेमाल दवाओं से जुड़े लेनदेन में किया गया। उसके नाम से चेक और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए जाते थे। बयान के अनुसार सिरप दिल्ली से मंगाया जाता था और अतर्रा के गोदाम में उतारने के बाद उसका कारोबार किया जाता था। ई-वे बिल और बैंकिंग दस्तावेज पेश किए बचाव पक्ष ने इसे वैध व्यावसायिक लेनदेन बताते हुए इनवॉयस, जीएसटी, ई-वे बिल और बैंकिंग दस्तावेज पेश किए। यह भी कहा कि प्रवीण के पास से सिरप बरामद नहीं हुआ, केवल 52 हजार रुपये और मोबाइल मिला था। अदालत ने कहा कि इन दस्तावेजों से अभी यह निर्णायक रूप से साबित नहीं होता कि पूरा लेनदेन वास्तविक था। 250 कार्टन में 30 हजार शीशियां बरामद अभियोजन के अनुसार 250 कार्टन में 30 हजार शीशियां बरामद हुईं। प्रत्येक शीशी 100 एमएल की होने से कुल मात्रा 3 हजार लीटर है। अदालत ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 और धारा 37 की शर्तों को देखते हुए प्रवीण को जमानत देने से इनकार कर दिया।
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30 हजार कोडीन कफ सिरप की बरामदगी का खुलासा:बांदा में हमीरपुर के नाम पर अतर्रा में उतरता था माल