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कानपुर देहात के डेरापुर क्षेत्र में अवैध क्लीनिक और पैथोलॉजी सेंटरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। विभाग ने सिठमरा, मुंगीसापुर और आसपास के इलाकों में बिना डिग्री और पंजीकरण के चिकित्सा गतिविधियां संचालित करने वाले 12 से अधिक केंद्रों को नोटिस जारी किया था, लेकिन आरोप है कि नोटिस की समयसीमा गुजरने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग की जांच में कमलपुर बंबा से अतुल कुमार, डेरापुर श्यामनगर से विमल कुमार, सिठमरा से बीरन सिंह और सुशील कुमार समेत मुंगीसापुर क्षेत्र में उमाकांत, प्रिंस राज, स्वाति हॉस्पिटल, सौरभ पैथोलॉजी, अमन कुमार, शशिकांत सचान, विश्वनाथ और इंद्र प्रकाश के नाम सामने आए थे। इसके अलावा रतनियापुर चौराहे पर भी एक केंद्र को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। नोटिस के जरिए संबंधित संचालकों से अपनी डिग्री, पंजीकरण और अन्य जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। लेकिन स्थानीय स्तर पर आरोप है कि समयसीमा बीतने के बावजूद कई जगह कथित रूप से चिकित्सा गतिविधियां जारी हैं। मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब डेरापुर सीएचसी के नोडल प्रभारी और डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार से कार्रवाई को लेकर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने पूरे मामले की जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने बताया कि 10 सितंबर से 30 सितंबर तक चले झोलाछाप विरोधी अभियान के दौरान हुई छापेमारी और कार्रवाई की जानकारी सीएचसी अधीक्षक डॉ. पुनीत पांडेय की ओर से उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।
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नोटिस के बाद भी नहीं थमे झोलाछापों के क्लीनिक:डेरापुर में 12 से ज्यादा अवैध क्लीनिक-पैथोलॉजी को नोटिस, कार्रवाई पर सवाल