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हापुड़ के सलाई गांव की रहने वाली दिलकश जहां चौधरी के लिए आठवीं के बाद की पढ़ाई आसान नहीं थी। परिवार और समाज के विरोध के बावजूद, उनकी मां नाजमा बेगम ने उन्हें शहर के कॉलेज में पढ़ने के लिए समर्थन दिया। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, दिलकश ने स्कूल छोड़ चुकी 300 से ज्यादा बेटियों को दोबारा शिक्षा से जोड़ा और उन्हें रोजगार से भी जोड़ा। महिला सशक्तिकरण के लिए उन्हें 22 से ज्यादा पुरस्कार मिले हैं। 100 परिवार बने आत्मनिर्भर दिलकश ने समाजशास्त्र से एमए और फिर एलएलबी की। डिजाइनिंग का प्रशिक्षण लिया और महिलाओं को आर्टिफिशियल ज्वेलरी व साड़ी डिजाइनिंग से जोड़ा। ‘खुशी’ स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने ज्वेलरी का काम शुरू किया, जिसकी सालाना आय 3 से 4 लाख रुपये है। उनके प्रयासों से 100 से अधिक परिवार कपड़ा और ज्वेलरी डिजाइनिंग से जुड़े हैं। इसके बाद उन्होंने उन बेटियों को पढ़ाई से जोड़ने का काम शुरू किया, जिन्होंने आर्थिक या सामाजिक कारणों से स्कूल छोड़ दिया था। विदेशी दल से सीखी कला, दिल्ली-सूरत में लिया प्रशिक्षण वर्ष 2000 में गांव सलाई में आए विदेशी दल ने महिलाओं को कपड़ों और आभूषणों पर डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया था। दिलकश ने इसी काम को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली और सूरत में प्रशिक्षण लिया। बाद में महिलाओं को आर्टिफिशियल ज्वेलरी और साड़ी डिजाइनिंग से जोड़ा। इससे उन्हें घर से ही आमदनी का जरिया मिला। 300 से ज्यादा बेटियां उच्च शिक्षा से जुड़ीं दिलकश के प्रयासों से 300 से अधिक बेटियां उच्च शिक्षा हासिल कर चुकी हैं, जबकि 100 से ज्यादा परिवार कपड़ा और ज्वेलरी डिजाइनिंग के काम से जुड़े हैं। महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उन्हें विभिन्न राज्यों से 22 से अधिक पुरस्कार मिले हैं। 2015 में विश्व व्यापार मेले में प्रदेश की अग्रणी महिला उद्योग श्रेणी में उन्हें द्वितीय पुरस्कार मिला था। पीएम के कार्यक्रम का किया संचालन 11 मार्च 2024 को दिल्ली में आयोजित ‘सशक्त नारी, विकसित भारत’ कार्यक्रम के संचालन के लिए हिंदीभाषी क्षेत्र से दिलकश का चयन हुआ था। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में उन्होंने कार्यक्रम का संचालन किया। ट्रेड शो में मिले लाखों के ऑर्डर
हाल में ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिलकश ने आर्टिफिशियल ज्वेलरी और होम डेकोर उत्पादों का स्टॉल लगाया। वह बताती हैं कि यहां मुंबई, फरीदाबाद और दिल्ली के कारोबारियों से उन्हें लाखों रुपये के ऑर्डर मिले। अब उनका लक्ष्य 1500 परिवारों की बेटियों को रोजगार से जोड़ना है।
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तेजस्विनी: दिलकश ने 300 बेटियों को भविष्य संवारा:हापुड़ में मां के सपोर्ट से महिलाओं को ज्वेलरी-साड़ी डिजाइनिंग से जोड़ा, 22 से ज्यादा पुरस्कार जीते