![]()
बलरामपुर: 2 अक्टूबर 1975 को देश में आंगनबाड़ी की शुरुआत हुई थी। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और नानाजी देशमुख की ‘कर्मभूमि’ से 1 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक पहल हुई है। बलरामपुर जिले से अटलजी और ‘राष्ट्रऋषि’ नानाजी दोनों का विशेष जुड़ाव रहा। अटल जी को दो बार 1957 और 1967 और नानाजी को 1977 में क्षेत्र की जनता ने सांसद बनाकर भेजा था। अब गोंडा सांसद और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन व विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ‘राजा भैया’ के विशेष प्रयासों से उतरौला विधानसभा के रेहरा बाजार ब्लॉक से ‘सुपोषित और विकसित भारत’ की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बलरामपुर जिला प्रशासन और जोमैटो फीडिंग इंडिया फाउंडेशन के बीच हुए समझौते के माध्यम से रेहरा ब्लॉक के 60 आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। यह संगठन अभी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल जिले नंदुरबार के 574 आंगनवाड़ी केंद्रों में यह कार्यक्रम संचालित कर रहा है। देश के 160 जिलों में फीडिंग इंडिया फाउंडेशन लगभग 31 करोड़ भोजन और नाश्ते, स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचा चुका है। यह पहल इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उत्तर प्रदेश का बलरामपुर जिला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल ‘आकांक्षी जिला कार्यक्रम’ (ADP) के अंतर्गत नीति आयोग द्वारा चुने गए देश के 112 जिलों में शामिल है। इसका उद्देश्य देश के 112 अपेक्षाकृत कम विकसित जिलों का तीव्र और प्रभावी विकास करना है। जनवरी 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आकांक्षी जिला कार्यक्रम’ की शुरुआत की थी। इसके जरिए केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों के साथ साझेदारी में देश के कम विकसित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। एडीपी पांच क्षेत्रों- स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि और जल संसाधन, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास में प्रगति का आकलन करता है। इसके अलावा बुनियादी ढांचे के तहत 49 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों केपीआई (Key Performance Indicators) में वृद्धिशील प्रगति की निगरानी करके एक डेटा-आधारित सुशासन मॉडल का पालन करता है।
Source link
आकांक्षी जनपद के 60 आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलेगा पौष्टिक भोजन:अटलजी और नानाजी की कर्मभूमि से हुई पहल, जोमैटो फाउंडेशन करेगा सप्लाई